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मारा हंसला रे चालो शिखरगढ़ काया कोटड़ी में रंग लागो mara hansla re chalo shikhargad kaya kotadi me rang lago

 

मारा हंसला रे चालो शिखरगढ़,

काया कोटड़ी में रंग लागो,

रंग लागो ज्‍याको भो भागो।।टेर।।

 

राम नाम को पीवो प्‍याला,

पीवत पीवत रंग लागो।

सुरत नीरत मल आई ठीकाणे,

अब काया में पीव जागो।।1।।

 

डांवी इंगला जीमणी पिंगला,

सुखमण के धोरे लागो।

त्रिवेणी का रंग महल में,

अजब जड़ाको अब लागो।।2।।

 

झरमर झरमर महीड़ो बरसे,

घरहर इन्‍दर गाजे।

मार हाथ बाबो चढ्यो शिखर में,

अणगड़ से बातां लागो।।3।।

 

धरण गगन बिच तपसीड़ो तापे,

वणी बाबाऊ मारो मन लागो।

मछन्‍दर प्रताप जती गोरख बोले,

भाग पुरबलो अब जागो।।4।।

आवे नहीं जावे मरे नहीं जन्‍मे नहीं धूप नहीं छाया aave nahi jave mare nahi janme nahi dhoop nahi chaya

 

आवे नहीं जावे मरे नहीं जन्‍मे,

नहीं धूप नहीं छाया,

ऐसा अणगड़ धाया।।टेर।।

 

माता नहीं जद जनम हमारा,

न कोई ओदर आया।

दाई मांई का काम नहीं रे,

न कोई जापा जणाया।।1।।

 

धरती नहीं जद धूणा हमारा,

बना अगनी तप लग्‍या।

हाड़ मांस बिना लिया लंगोटा,

बना नीर में न्‍हाया।।2।।

 

बिना गहरू में भंगवा रंगिया,

बन घर अलख जगाया।

बना जोली में सब जुग मांग्‍या,

बना भूख में खाया।।3।।

 

पग बना पंथ नेण बना नरखिया,

बना जीब्‍या गुण गाया।

नांवा में इक नाम नरमलो,

सतगरू मोह बताया।।4।।

 

माने मल्‍या मछन्‍दर जोगी,

भिन्‍न भिन्‍न कह समझाया।

कहे गोरखजी सुणो कबीरा,

आपू में आप समाया।।5।।

हरि भज हरि भज हीरा परखले समझ पकड़ नर मजबूती hari bhaj hari bhaj heera parkh le samaj pakad

 

हरि भज हरि भज हीरा परखले,

समझ पकड़ नर मजबूती।

अष्‍ट कमल पर खेलो मेरे दाता,

और बातां सब झूठी।।टेर।।

 

घरहर घरहर मेहा बरसे,

सोहं सोहं क्‍या होती।

तरवेणी का रंग महल में,

हंसा चुग रिया निज मोती।।1।।

 

सत् समरण का सेल बणाले,

ढाल बणाले धीरज की।

काम क्रोध ने मार भगादे,

जद जाणू थारी रजपूती।।2।।

 

पांचों चोर बसे काया में,

जिनकी पकड़ो सिर चोटी।

पांचां ने मार पचीसा ने बश कर,

जद जाणू थारी बुध मोटी।।3।।

 

पकी धड़ी का ताल बणाले,

काण न राखे पाव रत्‍ती।

कहे मछन्‍दर सुण ले गोरख,

अलख लखे सो खरा जती।।4।।

समझ कर खेलणा हमारा गुल्‍ली डंडा samaj kar khelna hamara gulli danda



समझ कर खेलणा हमारा गुल्‍ली डंडा।।टेर।।

राम नाम की गुल्‍ली बणाई,
सत नाम का डंडा।
ओ मदवो खेलण लागो,
दिया जीत का डंक‍ा।।1।।

कबद नार ने कबद बिचारी,
सुणोे पिया बोरंगा।
कबद नार पाखरिया ने मोयो,
कर दिया चंगा भंगा।।2।।

समझ नार ने समझ बिचारी,
सुणो पिया एक रंगा।
समझ नार समझबा लागी,
कर दिया एक रंगा।।3।।

माने मल्‍या मछान्‍दर जोगी,
दिया जीत का डंका।
केवे गोरख सुणो कबीरा,
रोप्‍या गंगज में झण्‍डा।।4।।

लोभीड़ो जाणे अमर मारी काया थोड़ा जीबा के खातर कई जोड़े माया lobhido jaane amar mari kaya thoda jeeba ke khatar



लोभीड़ो जाणे अमर मारी काया,
थोड़ा जीबा के खातर कई जोड़े माया।
धन जोबन बादल वाली छाया।।टेर।।

जल की भींत पावन का थम्‍भा।
रूक गया पावन सतगुरां वाली माया।।1।।

काची काची मटकियां भरिया ठण्‍डा पाणी।
सुस गया नीर कमलागी काया।।2।।

जंगी जंगी पेड़ गहरी गहरी छाया।
छाया तो मारे सतगरू वाली माया ।।3।।

सोना रा महल रूपा केरा छाजा।
छोड़ चल्‍या काया नगरी का राजा।।4।।

जंगी जंगी सांकलिया जकड़ बंधिया भेंडा हस्ति,
टूट जावे सांकलियां छूट जावे हस्ति।।5।।

बोल्‍या गोरखजी मछान्‍तर का चेला।
लदगी फौजा पड्या रहग्‍या डेरा।।6।।   

बात करे बाणियो हुंकारो देवे कूण baat kare baniyo hunkaro deve kun


बात करे बाणियो हुंकारो देवे कूण,

हुंकारो देवे कूण।।टेर।।

 

आंधो तो कीदी अरजी,

काण्‍यो छोड्या रूण।

सूजता तो सासे पडग्‍या,

मरग्‍या माथो धूण।।1।।

 

पांगले तो हिम्‍मत कीदी,

देवल दीदा चूण।

देवता का दरसण करता,

मरता जीवां जूण।।2।।

 

चोरां के तो खेती भायी,

लूले लीदी लूण है।

पोर बायी बाजरी,

लाटा लीदा कूण है।।3।।

 

सतगरू शरणे जावज्‍यो,

पूरा लीज्‍यो गूण।

गोरखनाथ जोगी बोलिया,

भरज्‍यो पूरा पूर है।।4।।

आत्‍म हो आप रूप धर आया aatm ho aap roop dhar aaya bhajan lyrics



आत्‍म हो आप रूप धर आया।

सतगरू सिमरथ होय पार जद पाया।।टेर।।

 

है काया को रूप,रूप सब माया।

सतगरू मल्‍या जदी पार पाया।।1।।

 

प्रेम बना नहीं ढोड़ मारग अटकाया।

थक्‍या जो थर नहीं करम लटकाया।।2।।

 

धर्म बना नही ढोड़ मुक्‍त नही पाया।

भटक भटक मर जाय पार न आया।।3।।

 

मल्‍या मछन्‍द्रनाथ दर्शण वे पाया।

गरू चरणां में आय गोरख गुण गाया।।4।।

गोरख धन्‍धा जोग कमायो वो नाथ जी भजन लिरिक्‍स gorakh dhanda jog kamaya vo dinanath ji



पांचो पांचो भाया की ,

एकन मण्‍डली ओ नाथ जी।

वे तो छटा छटा ,

श्री भगवान वो दीनानाथ ।।1।।


गोरख धन्‍धा जोग कमायो वो नाथ जी ।।टेर।।


दोराणिया जेठाणी ,

ननद भोजाई वो नाथजी।

वो तो चारां को एक ,

भरतार वो दीनानाथ ।।2।।


कुड़ा के किनारे गरू मारा ,

समन्‍द सुखाया वो जी ।

वो तो नाडूल्‍या राे छेय ,

न पार वो दीनानाथ ।।3।।


 सुई का नांका में गरू मारा ,

हस्‍ती समाया वो जी ।

वे तो सुंगल्‍या पोल्‍या में नहीं ,

माया वो दीनानाथ ।।4।।


दोय कर जोड़,

जती गोरख बोल्‍या वो जी।

वे तो सत अमरापुर,

पाया वो दीनानाथ ।।5।।  

जिणे तार चढ़ जाय मिले नित मेवा भजन लिरिक्‍स jine tar chad jaay mile nit meva



जिणे तार चढ़ जाय मिले नित मेवा।
मोक्ष मुगत जद पाय ,
करम तज देवा ।।टेर।।

अखे कंवल के मांय ,
अणघड़ देवा ।
हे ज्‍योति परकाश ,
जोत जलेवा ।।1।।

दस बाजा की वाज ,
ढोल गुरेवा ।
बाजे मृृृृदंग ताल ,
लखण तो ऐवा ।।2।।

फेर जनम नहीं आय ,
मुकत पद ऐवा ।
भाग पुरबला पाय ,
चरण नत सेवा ।।3।।

मल्‍या मछन्‍दरनाथ ,
दरसण नत देवा ।
गावे गोरखनाथ ,
आपकी सेवा ।।4।।

गरू चरणां में आय होवे निवेड़ा भजन लिरिक्‍स guru charna me aay hove niveda



गरू चरणां में आय होवे निवेड़ा।

टले जमा की मार ,

बचन सुण मेेेरा ।।टेर।। 


हरदा कंवल के मांय ,

राम है मेरा ।

वहां जा प्रीत लगाय ,

मटे जम जेड़ा ।।1।।


गरू शबद परकाश ,

और अंधेरा ।

जहां शबद को आगे ,

मिले मले बहेरा ।।2।।


गरू बिना पावो नाय ,

करोजी हेरा ।

मन मुक्ति नहीं होय ,

मटे नहीं फेरा ।।3।।


पूरब पेला भाग ,

साईजी के नेड़ा ।

गावे गोरखनाथ ,

भजन  कर हेरा ।।4।। 

है कोई रूप अरूप संगत नत कीजे भजन लिरिक्‍स hai koi roop aroop sangat nat kije



है कोई रूप अरूप ,
संगत नत कीजे।
रहो चरणो का दास ,
असी गत लीजे ।।टेर।।

नाभ कंवल के मांय ,
अमीरस पीजे ।
भगत सगत पाय ,
चरण चत दीजे ।।1।।

आठ पांख पर वाण ,
हरा रंग कीजे ।
आठ ही अंग पेछाण ,
असी धन दीजे ।।2।।

पंच ज्‍योति परकाश ,
दरसण  कर लीजे ।
गरूगम से गम पाय ,
भजन अंग लीजे ।।3।।

मल्‍या मछन्‍दरनाथ ,
दरसण कर लीजे ।
गावे गोरखनाथ ,
रूप गह लीजे ।।4।।

भाईड़ा भजलो राम गेला गम का भजन लिरिक्‍स bhaida bhaj lo ram gela gam ka



भाईड़ा भजलो राम गेला गम का।

झीणा झीणा जपना जाप ,

सरोदा सुन्‍न का हे वोजी ।।टेर।।


सिंवरू सारद माय बुद्धि दो दाता।

घट सिवरू हिंगलाज उगम की बातां ।।1।।


इला पिंगला सोध खेल सुखमण का ।

कुंभ कलश भर लाय मेट दी संका ।।2।।


तरबीणी तार लगाय तंदूरा तन का ।

वहां नरभे हो जाय मोरणा मन का ।।3।।


सोवनी शिखरगढ़ देख अणगड का।

इला पिंगला सोध खेल सुखमण का ।।4।।


गोरख जपिया जाप और कोई जपणा ।

अन्‍त समय के मांय कोई नहीं अपना हे वोजी ।।5।। 




सुर बिना पूंगे नाय मारग थक जाता भजन लिरिक्‍स sur bina punge naay marag thak jata


 

सुर बिना पूंगे नाय मारग थक जाता।

सुर ने सिवरे सोई भाग से पाता हे वोजी।।टेर।।


कंठ कंवल के मांय सरस्‍वती माता।

वो आवे टकशाल भजन फल पाता ।।1।।


शिव शक्ति के हेत अमृत बरसाता।

पीवे भरला साद अमर हो जाता ।।2।।


नुगरा ने पीवे जहर जहर मर जाता।

करोड़ जतन कर देख मोक्ष नहीं पाता ।।3।।


मल्‍या मछन्‍द्रनाथ मारग बतलाता।

गावे गोरखनाथ भजन फरमाता हे वोजी ।।4।।

कहां से आवे बीज जांच कर वांका भजन लिरिक्‍स kaha se aave beej jaanch kar vaanka



कहां से आवे बीज जांच कर वांका।

जैसी जूड़ी पाय संत सुर का हे वोजी।।टेर।।


षट् कंवल के मांय देख्‍या बन्‍का।

बारा बीज विचार खेल है वांका ।।1।।


लंग भंग के बीच रूप सांई का।

नुगरा जाणे नाय करम की संका ।।2।।


जैसी जूणी पाय मोडरिया अंका।

शशिया देव ने साज खेल आहंग का ।।3।।


गोरख करी अवाज आतृम कर अंका।

पड़े जमा की मार खोल दे संका ।।4।।

हम दाेनों के बीच राम है मेरा भजन लिरिक्‍स hum dono ke bich ram hai mera



हम दाेनों के बीच राम है मेरा।
छ: सांसा के मांय,
किया में हेरा है वोजी ।।टेर।।

ओम शबद के मांय ,
बीज है बारा।
सोहं शबद के मांय,
मन है प्‍यारा ।।1।।

ओम शबद के मांय ,
ब्रह्माण्‍ड है सारा।
सोहं शबद के मांय ,
दसो अवतारा ।।2।।

ओम का अक्षर तीन, 
तीन से न्‍यारा।
अकार उकार मकार ,
देख ले प्‍यारा ।।3।।

हाले नहीं होठ कंठ ,
जीब से न्‍यारा।
गावे गोरखनाथ ,
राम रणुकारा हे वोजी।।4।। 




शशिया भाण के बीच खेेल कर बन्‍दा भजन लिरिक्‍स shashiya bhan ke bich khel kar banda



शशिया भाण के बीच खेेल कर बन्‍दा ।
छ: सांसा में नाल हरि तो जन्‍दा है वोजी ।।टेर।।

मूल कंवल के मांय गणेशा बन्‍दा।
रिद्धि सिद्धि ढोले पांव होवे आनन्‍दा ।।1।।

मेरा सतगरू है दातार काट जम फन्‍दा।
मुझको सूजे नाही जनम का अन्‍धा है वोजी ।।2।।

पीला रंग पछाण पांच है झण्‍डा।
पांचो ही पांख पछाण गाज रही गंगा ।।3।।

मल्‍या मछन्‍द्रनाथ होवे आणन्‍दा।
गावे गोरखनाथ रूप सोवंगा है वोजी ।।4।।

धन है वांका भाग संगत में जावे भजन लिरिक्‍स dhan hai vaka bhag sangat me jaave



धन है वांका भाग,
संगत में जावे,
सब संता में जाय,
राम रिजावे ।।टेर।।

सतसंग महिमा अपार,
पार कोई पावे।
गरू चरणां में जाय,
शीश नवावे ।।1।।

सतसंग महिमा अपार,
पार वे पावे।
पाया जो तो फेर 
जनम नहीं आवे ।।2।।

सतसंग महिमा अपार,
संत सब गावे।
करोड़ गऊ दे दान 
पार नहीं पावे ।।3।।

मिलिया मछन्‍द्रनाथ 
दरसण वे पाया।
गरू चरणां में आय 
गोरख गुण गाया ।।4।।

सेवा मारी मानो स्‍वामी रे सुंडाला sewa mari mano swami re sundala bhajan lyrics



सेवा मारी मानो स्‍वामी रे सुंडाला,
पूजा मारी मानो गणपत गवरा।
खाेेेलो मारा हरदा रा ताला वो जी   ।।टेर।।


जल तो चढ़ाऊ देवा नहीं रे अछूता।
जल ने तो मछलिया बटालिया वो जी ।।1।।

दूध रे चढ़ाऊ देवा नही रे अछूता।
दूध ने तो बचिया बटालिया वो जी ।।2।।

धूप तो चढ़ाऊ देवा नही रे अछूता।
धूप ने तो अग‍नी बटालिया वो जी ।।3।।

लाडू तो चढ़ाऊ देवा नही रे अछूता।
लाड़वा ने तो मांखियां बटालिया वो जी ।।4।।

फूलड़ा चढ़ाऊ देवा नही रे अछूता।
फूलड़ा ने तो भंवरा बटालिया वो जी ।।5।।

शबद चढ़ाऊ देवा नही रे अछूता।
शबद ने तो जीब बटालिया वो जी ।।6।।

शीश चढ़ाऊ देवा नही रे अछूता।
शीश   ने तो छरिया बटालिया वो जी ।।7।।

मछन्‍दर प्रताप जती गोरख बोले।
सत न धर्म अछूता है वो जी ।।8।।





मैं थाने सिवरूं गजानन्‍द वो देवा main thane sivaru gajanand deva bhajan lyrics



मैं थाने सिवरूं गजानन्‍द वो देवा,
हिरदे करो न उजियाला जी।
सरस्‍वती माता वो शारदा ने सिवरूं,
खोलो मारा हरदा तालाजी।
निंदरा ने मारो भोलानाथ जी।।टेर।।


जरणी न जायो रे ओदर कोनी आयो।
अमिया राेे लाल कहवायो जिवो।।१।।
 
पाणी सूं तो पतलो पवन सूं जीणो।
चोबारिया तो हनुमत गाजे जी वो।।२।।

हाथ रे गालू रे हीरो हाथ कोनी आवे।
मुठिया में नहीं रे समावे जी वो।।३।।

मछन्‍दर प्रताप जती गाेरख बोल्‍या।
खुल गया भरम वाला ताला जी वो।।४।। 






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