मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान,
सागर में नैया डार दई ।।टेर।।
काहे की या नाव बनाई, काहे की पतवार।
रामा काहे की लगा दी जंजीर ।।1।।
राम नाम की नाव बनाई, भक्ति की पतवार।
ओ रामा ज्ञान की लगा दी जंजीर ।।2।।
कौन सखी वामें बैठन हारे, कौन है खेवनहार।
रामा कौन लगावे बेड़ा पार ।।3।।
सीता मैया बैठनहारी, लक्ष्मण खेवनहार।
मोरे राम जी लगावे बेड़ा पार ।।4।।
तुलसीदास आस रघुवर की, चरणन में बलिहार।
मोरे बालाजी लगाहे बेडा पार ।।5।।
