मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान,
सागर में नैया डार दई ।।टेर।।
सागर में नैया डार दई ।।टेर।।
ओ मोरे संकट के
कटैया हनुमान, हमारे संकट काटो प्रभु
ओ मोरे संकट के कटैया हनुमान हमारे संकट काटो प्रभु ।।टैर।।
अरे अंजनी
पुत्र केसरी नंदन तुम जग जग के काटत बंधन,
तुमरे हृदय बसे रघुनंदन हाँ, तुमरे हृदय में बैठे सीताराम ।।1।।
आके संकट हरो
हमारो, हाँ तुमको संकट मोचन मानत
है भगवान ।।2।।
आके संकट हरो हमारे, हाँ लक्षण जी के बचालय तुमने प्राण ।।3।।
ये माया तेरी बहुत कठिन है राम । टेर।
मूसे असवारी रामा गणपत आवो,
संग में रिद्धि सिद्धि लावो।।१।।
नंदीये असवारी रामा शिवजी पधारो,
संग में पार्वती लावो।।२।।
ब्रह्मा भी आवो विष्णु भी आवो,
संग में लावो जी सरस्वती।।३।।
रामा भी आवो सावरांं लछमण आवो,
संग में सीता जी को लावो।।४।।
बाई मीरांं के प्रभुु गिरधर नागर,
चरणों में शीश नवाऊ नवाऊ।।५।।
कोई पीये राम रस प्यासा
राम रस खासा है जी
गगन मण्डल से अमरत बरसे
उनमुन के घर वासा ।टेर।
शीश उतार चरण में धर दे
करै ना तन की आशा
जो भी पीये वो जुग जुग जीये
कबहु ना होय निराशा ।1।
मोल करे तो थके दूर से
तोलत टूटे स्वांसा
इतना महंगा अमरत बिकता
जहर डूबा रही माशा ।2।
इण रस काज नृप भया योगी
छोडया भोग विलासा
अधर सिंहासन बैठे रहते
भस्म लगाई उदासा ।3।
गोरखनाथ भरथरी रसिया
और कबीर रैदासा
गुरु दादू परताप से
पी गये सुन्दर दासा ।4।
लख चौरासी में भटकत भटकत
आण मिलीया गिरधारी
अबे मारी काया आय सुधारी ।टेर।
गुरु शास्त्र के शरणे आयो
लागी लगन हमारी
पंची करण पढ़ कर देख्यो
आतरम अनुभव भारी ।1।
पांच कोस और सात भौम का
खट शट शरीर है
ज्यारी चौवदा लोक तीन गुण प्रस्यां
सौला सुन अधी मारी ।2।
आला पींगला सुखमण
समज्या प्रगती न्यारी
अन्त करण खोल समजाया
चित, मन, बुद्धि, अहंकारी ।3।
सतगुरु मिल्या सायरा मलीया
धोंका नहीं लगारी
लाडू नाथ अभेपद पाया
तोड़ी भ्रम अडारी ।4।
ये तो समदर भरिया भारी
ज्यामे नाय सके नर कोई ।टेर।
समदर सात बताया
वस्तु मोल अमोलक पाया
ज्यों कोई नाया सुखसागर में
चोरासी कट जाई ।1।
उण सागर में हीरा मोती
गुरु बिन कुण प्रसावे
कृपा करी गुरु देवजी
माने पार लगावे वोई ।2।
इण समदर में है गुल क्यारी
जिन को देख मन भली विचारी
दुरमत गयी भाग
सुमती की राय बताई ।3।
समदर नाया उमंग घर पाया
सतगुरु सेन बताई
लाडूनाथ चरण चितलाया
सुरत ऊगम गर पावे ।4।
मनख जन्म का दो दिन रहग्या
आखीर चौरासी में जावे ओ
मन गुरु सरण में आये ।टेर।
लख चौरासी में भटकत भटकत
सन्ता सरणें आवे
भली करी मारा सतगुरु दाता
अमर पट्टो फरमावे ।1।
बगला के जोड़े हंसों बेठो
बगला में बगलो कुवावे
नाडुलियों में मछीया चुगता
खूब माने मातो चुगावे।2।
पारस के संग लोहा अड़ीया
लोहा ने पारस बणाये
जम राय का रंग महल में
ओ मन अबे नहीं जावे ।3।
शंकरनाथ मिल्या गुरु पुरा
भुल्या ने रााह बतावे ।
लाडुनाथ समज कर परख्या
हेर हीरा घरे लावे ।4।
पणीयारी हो जा तैयार
बेवड़ो खाली आसी
खाली आली ये
गणी पस्तासी ।टेर।
संत जुगम जागी
सरिया दे कुमारी है
औरी जागा पेलाद कुवार
संग रतना जागी ।1।
सीता रम्बा
ओलिया जी जागी है ।
औरी जागा हरि चन्द राव
संग तारा जागी ।2।
राधा ये रुकमण
कुंताजी जागी हैं
औरी जागा जेटल दे जी राव
संग पंचोली जागी ।3।
मिरा मेगडी
सुलका दे जी जागी है
औरी जागा बलीचन्द राव
संग सज्या जागी ।4।
रावल रुपा
जेसल तोला जागा है
औरी जागा पंचम रा पीर
संग डाला जागी ।5।
गोपीनाथ माने
सतगुरु मीलीया है
गुण गावे शंकर नाथ
कट जावे चोरासी ।6।
हरि ने सीवरलो वारम्बार साधु भाई
मारगीयों तो सोरो गणो ।टेर।
कटासु आयों मानवी
जाणों कुण से मुकाम
सपना रूपी संसार में वो भाया
तरणो तो दोरो गणो ।1।
पीछम से आया सुदरी
जाणो उगम क्षाम
एक पलक माने राख से
प्यारी सरणे तो गुराजी तणो ।2।
संग करलो सायबा
फेरा फर लो सात छोड़ो मती रे
भकमी बार में मारा
सायबा थारी मने भी घणो ।3।
सुण सुदरी व्याव की
परणीया चोरासी लाख
अबके तो थारे संग रमीयाये प्यारी
अणी
सेज को अन्दगणो ।4।
गोपीनाथ गुरु बेटीया
लगन लिखया परभात
शंकरनाथ माडो जीतया
प्यारी पायो पीयजी गुरु जी तणो ।5।
भक्ति को फल उचार सुणज्यों
कोई भुलो मती ।टेर।
नावे धोवे पाठ वृत करता
जाय हरि के मन्दिर पग धरता
जॉको उच्च कुल अवतार
मुख पर सोवे रूप अती ।1।
धन बाटे तो धन फल पावे
धरा अपरे नाम कमावे
नरसी ने किया विचार
जाके मायरो भरयो अती ।2।
ज्वालामुखी जपे जत प्राणी
जाय जगन में धरणी माणी
पार्वजन्म जरूर राजा की
पदणी मिले अती ।3।
धावे धूम करे गुरु सेवा
जीवत भोगे मिश्री मेवा
भरीया ही मोक्ष हो जाय
वाकी चोरासी की छुटे गती ।4।
गोपीनाथ मिलया गुरू देवा
शंकर नाथ करे गुरु सेवा
सतगुरु ने सोर पर धार
और आसरो लेवो मती ।5।
थाने जाणियां किरतार
थाने जाणीयां किरतार
लीला रचाई ज्यारी अपरमपार ।टेर।
आसमान में सूर्य रचायो
तपता तेज अपार
गटत बढ़त था चन्द्र रचाया
तारा लख हजार ।1।
मक्का में महमद कुआया
मथुरा मोहन सार
मक्का में था बकरी चराई
मथुरा गऊ हजार ।2।
मक्का मदीना आप बिराजो
बसीयों सागर पार
मथुरा मोहन राम अयोध्या
रोशन किया अपार ।3।
दो ही दीन था अलग बणायों
हिन्दु मुसलीम जार
अलग भेद माने वो
नर डुबे काली धार ।4।
एको ब्रह्म दुनीया नाशत्ति
जाणे जाणन हार
मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान, सागर में नैया डार दई ।।टेर।। काहे की या नाव बनाई , काहे की पतवार। रामा काहे की लगा दी जंजी...