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रे मन मत डोल है तेरा तुझ मां‍ही man mat dol hai tera tujh mahi mat dole



रे मन मत डोल है तेरा तुझ मां‍ही,

तांय भज मत डोले।।टेर।।


देवन जाय न दरसे दाता,

नहीं मस्जिद में बोले।

रूप न रेख कछवन देख्‍या,

अण घड़ अन्‍दर बोले।।१।।


तीरथ जाय थाय नही पाया,

भोन्‍दूू भीतर जोय ले।

गुरू गम गेल सेलज्‍यूं सूझे,

 पीप वासना झोले।।२।।


सुरत सहेली सुखमण भेली,

मिलकर चढ़ महोले।

परस्‍या पिव गगन बिच गेवी,

पड़दे प्रेम हिंड़ोले।।३।।


कर शब्‍द प्रकाश उजास अगम का,

देह बिच जोह ले।

मेटो जाल भरमना भानो,

निज भज निर्भय होयले।।४।।


चंंद चकोर जोय जोय जल में,

वांसूं ऐसा होयले।

ऐसे लिव धर लखे ''लिखमा'',

जब हरि अन्‍तर खोले।।५।।

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