अर्ज करू अजमाल जी रा चावा,
हरी राख बाड़ी थारी ।।टेर।।
गवरी रो नन्द गुणेश मनाऊ,
रिद्ध सिद्ध रो दाता धारी ।
अजमल सुत रामदेव राजा,
राम कंवर अजमत धारी ।।१।।
मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान, सागर में नैया डार दई ।।टेर।। काहे की या नाव बनाई , काहे की पतवार। रामा काहे की लगा दी जंजी...