अर्ज करू अजमाल जी रा चावा,
हरी राख बाड़ी थारी ।।टेर।।
गवरी रो नन्द गुणेश मनाऊ,
रिद्ध सिद्ध रो दाता धारी ।
अजमल सुत रामदेव राजा,
राम कंवर अजमत धारी ।।१।।
दांतण फाड़ संपाडे बैठा,
दांतण री कितरी फाड़ी ।
भगतारां धणी आप पधारिया,
इसड़ी बात मालकां थारी ।।२।।
बालद लद आयो बिणजारो,
बालद में मिश्री भारी ।
आप कंवर जी पर्चो दियो,
लूण कियो बालद सारी ।।३।।
दूर देशां रा आवे जातरी,
प्रजा जात जड़े भारी ।
लड्डू चोखा चढ़े चूरमा,
रूपियो से पूजे झारी ।।४।।
गोकल से प्रभु काना उतरया,
आप बड़ा क्षमाधारी ।
गुरू खिंवजी रे शरणे लिखमा बोले,
राखो अलख लज्जा मारी ।।५।।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें