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नर थोड़ो चेनत हाल मारगिया में भो भारी nar thodo chetan haal margiya me bho bhari

 

नर थोड़ो चेनत हाल मारगिया में भो भारी।।टेर।।

 

पहला भो भगवान रजक पूरण हारी।

मत कर माया को अभेमान पलक में भिख्‍यारी।।1।।

 

दूजा भो गरूदेव जगत तारण हारी।

धर्या शीश पर हाथ नकलंग करी देह थारी।।2।।।

 

तीजो भो संसार रहणा मणधारी।

चाले संत की चाल परमल फूटे थारी।।3।।

 

चौथा भो है काल दन में आवे तीन बाली।

रटजो श्‍वांस म श्‍वांस राम और रुणकारी।।4।।

 

मोह का भरिया कूप डूब रिया नर नारी।

कहे हीरोजी भव थाग हो जावो भव पारी।।5।।

माया माण गणा नर तरिया करोड़ा में शाखा भराले maya maan gana nar tariya karoda me sakha bharale

 

माया माण गणा नर तरिया,

करोड़ा में शाखा भराले,

मन थू माया माण मजा ले।।टेर।।

 

कन्‍चन माया बांटो भाया,

दान पुन्‍न में लगाले।

खरच्‍या पछे होवे सवाई,

आगे की खरच्‍या बणाले।।1।।

 

खेती भावो वो फल पावो,

पांती तीन कराले।

खुद खाबा ने श्रीजी पूरे,

श्री को शीर चुकादे।।2।।

 

कामण माया आंगण सोहवे,

नीती नेम नमाले।

आया साध की साजो बन्‍दगी,

भोजन भाव जिमा दे।।3।।

 

झीणी माया बांटो भाया,

मन का मजा उड़ा ले।

बांटो तो गरू बचनाऊ बांटो,

गुरा की शाखा दराले।।4।।

 

माया माण नर तरिया,

अजपा का जाप जपाले।

कहे हीराराम गुरा को,

गुरूमुखी ज्ञानी कुवाले।।5।।

आनन्‍द फल पावो रे भगता की सेवा में anand fal paavo re bhagta ki seva me

घर आया सतगरू कर पूजो,

भरम से मत जाणो दूजो।

करम के देवो कूंचो,

साधू भाई नाम धरायो ऊंचो।

ऐसा फल पावो रे भाई,

ज्ञान गरीबी से।।1।।

 

आनन्‍द फल पावो रे,

भगता की सेवा में।।टेर।।

 

मोरधज के साधू आया,

संग माये सिंह लाया।

राजा राणी करोत चलाया,

एक फांक से सिंह जिमाया।

दूजी फांक का बालू जिवाया रे,

अरजुण की करणा से।।2।।

 

धन्‍ना भगत के साधू आया,

बीज भांत का भोजन बाणाया।

दन ऊगा का हल ले आया,

खेता माये तूम्‍बा भाया।

तूम्‍बा में मोती निपज्‍या रे,

वांकी अलपण भक्ति से।।3।।

 

नरसी ने माल लुटाया,

भाई बन्‍द ने मजा उडाया।

राधा राणी भगवत आया,

नानी बाई के मायरो लाया।

कपड़ा का मेह बरसाया रे,

नणदल का ताना से।।4।।

 

आक भाडबा नामोजी धाया,

अपणा पग पर फरस चलाया।

ऐसी मनमें करणा लाया,

पाग फाड़ पाटी बन्‍दवाया।

नामाजी को छपरो छायो रे,

वांके हीरा मोती से।।5।।

 

सेण भगत के घरे उमावो,

राजा के थे अब मत जावो।

पुन्‍न पुरबला भाग जगावो,

घर बैठा ही गंगा नहावो।

राजा को कोड तो मटग्‍यो रे,

हरि नाई बणबा से।।6।।

 

कबीर के घर ही नादारी,

बाण्‍या बामण कीदी ख्‍वारी।

मेलो थाप्‍यो बीज उजाली,

साधू आवे बजाता ताली।

कबीरा के बालद लाया रे,

वांके रूदन करबा से।।7।।

 

बगसोजी बीज थापी बारा,

हरदम बाजे रंग चौतारा।

बेटा ने तो काल मारा,

कहां गया अब मालक थारा।

आधा स्‍वर्ग से पाछो फेर्यो रे,

जरणी का बोला से।।8।।

 

शबरी बोर भीणबा लागी,

खाटा खाटा खुद ही खागी।

मीठा तो जीमे बड़भागी,

लछमण ने दीना त्‍यागी।

लछमण की मूरछा जागी रे,

सरजीवन बूंटी से।।9।।

 

जांके घर संता की सेवा,

वांने मलसी भगवत देवा।

जनम जनम का कटसी केवा,

अमरापुर में मलसी मेवा।

हीराराम ने महमा गाई रे,

संता की शाखा से।।10।।

गरू सायब का दरबार में सतुकार मिलेला कांई सा भजन लिरिक्‍स guru sayab ka darbar me satukar milela bhajan lyrics

 


गरू सायब का दरबार में,

सतुकार मिलेला कांई सा।

सतुकार मिलेला कांई सा,

रणुकार मिलेला कांई सा।।टेर।।

 

सतगरू मिल जावे कामी,

कमद्या में पाड़ो मती खामी।

जाने समझो अन्‍तरयामी,

श्री किशन मानलो कांई सा।।1।।

 

सतगरू मिल जावे लोभी,

तन मन अलप दियो तो भी।

तन का मालिक है वो भी,

श्री बावन मान लो कांई सा।।2।।

 

सतगरू मिल जावे क्रोधी,

खुद मत राखो विरोधी।

जाने समझो आप सरोदी,

नरसिंग मान लो कांई सा।।3।।

 

सतगरू मिल जावे धर्मी,

ब्रह्म ज्ञान का मर्मी।

वे तारे जीव कुकर्मी,

वांने श्रीराम समझ लो कांई सा।।4।।


पदम पुराण में शाखा,

या भगतमाल में भाखा।

यू ‘हीरारामजी’ ने भाखा,

वांने सही मान लो कांई सा।।5।।

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