राग रेखता भजन raag rekhta bhajans lyrics
मना भाई इण विध सिमरण कीजे mana bhai in vidh simaran kije shashi ghar
मना भाई इण विध सिमरण कीजे,
शशी घर सूर सूर घर शशी है,
संग में सुखमण लीजे ।।टेर।।
स्वांस स्वांस गिण लीजे।।1।।
पद्मासन कीजे।
शब्द तणा समसेर हाथ ले,
नगर सेेठ हो रहीजे।।2।।
नामी नाम निर्त कर केवल,
शब्द सोहम रट लीजे।
प्रेम जोत रा उड़े पतंगा,
सत बून्द बरसीजे।।3।।
उसमें क्या जाणे से सारा usme kya jane se sara jane janan hara
उसमें क्या जाणे से सारा,
जाणेे जाणण हारा ।।टेर।।
रणुकार के उपरे,
सोले आंगल परियाणा।
मति सोहनी नेणां निरख्यां,
नाम वेद में ज्यांणा।।1।।
इन्दर भाण के उपरे,
तेज आकाशा तारा।
यहां भी शक्ति वहां भी शक्ति,
शक्ति का विस्तारा।।2।।
रूप बिना एक देवल दरसे,
अपरम रूप अपारा।
दो अक्षर से करो दोस्ती,
जब उतरो भव पारा।।3।।
चौदह लोक उसी का चाकर,
सायब है कर्तारा।
''लिखमीदास'' वहां घर पहुंचा,
देहि बिना दीदारा।।4।।
ओउ से काया भई सोउ,
सोउ से मन होय।
नीर निरंकार स्वासा भई,
''लिखमीदास'' भल जोय।।5।।
हवाल फकीरी कांई फिकर havaal fakiri kai fikar nis din tan
हवाल फकीरी कांई फिकर,
निस दिन तन विचदे फेरी।।टेर।।
करणी हन्दा कुतक लिया संग डोले,
ज्यां सुं दुबद्या पूर बसे चेरी।
मत मुकाम मांही रहे माता,
सुर्त पकड़ घर घेरी।।1।।
खपनी पेर क्षामारी खेले,
टोपी पहर ले प्रेम करी।
वह रहे खुस्याल बाल में हाई,
ज्यां सूं कलह कल्पना नहीं नेड़ी।।2।।
वांके चेला पांच हुक्म में हाजर,
परचावे बेरी।
चित चाैैैकी पर निश्चय बैठे,
मिल रहे श्याम समझ सेरी।।3।।
अकल अखाड़े ध्यान की धूणी,
ज्यां के शब्द निवास लायो अंगरी।
हरदम रहे हजरत सूं हाजर,
निर्जन नाथ लिया हेरी।।4।।
अलख अज्ञात नहीं रूप वर्ण,
गुण वांको भेद रही ममता मेरी।
कह ''लिखमी'' कुदरत का दर है,
रब रजैया है तेरी।।5।।
कर मन आवाज अलख रे द्वारे kar man awaaz alakh re dware fart fakiri
कर मन आवाज अलख रे द्वारे,
फर्ट फकीरी धीरू मन धारे,
आत्म देव पुकारे ।।टेर।।
मैं उघ राताली तनिक भरछाक हुआ अब मदमाता me ugh ratali tanik bharchak hua ab madmaata
मैं उघ राताली तनिक भरछाक
हुआ अब मदमाता ।।टेर।।
अमल एक राम नाम का रिजे amal ek Ram naam ka rije jyaa su levat magan
अमल एक राम नाम का रिजे,
ज्यां सूं लेवत मगन रहिजे।।टेर।।
एलम हरि रे नाम रो सतगुरु दिया बताय alam hari re naam ro satguru diya batay
एलम हरि रे नाम रो,
सतगुरु दिया बताय ।।टेर।।
और एलम सत् शब्द है,
सतगुरु दिया सिखलाय।
पतवाणा प्रतीत सूं,
एलम भेट्या घट मांय।।1।।
भरम भूतसा काढिया,
लग रह्या तन के माय।
उपज्यो विचार एलम ते,
तब भरम सभी भग जाय।।2।।
दुबद्या डाकण देह की,
खबर बेहुणो खाय।
इकतारी निज मंत्र से,
दुविधा जाय बिलाय।।3।।
सांसे सर्प की झाट से,
शोक जहर चढ़ जाय।
मिले ज्ञान पुरुष गारडु
सांसा जाय बिलाय।।4।।
ब्रह्म वेद से मिल रहे,
कर्म राेेग कट जाय।
''लिखमो'' एलम अलेखदा,
सहजा होत सहाय।।5।।
बेजो नांव रो कोई बणसी राख विवेक bejo naav ro koi bansi rakh vivek
बेजो नांव रो कोई बणसी राख विवेक,
निर्गुण गांव रो।।टेर।।
हो कारीगर दाता चरखो अजब बणायो ho karigar data charkho ajab banayo
हो कारीगर दाता चरखो अजब बणायो,
हो अवगत अविनासी चर्खो अजब बणायो।।टेर।।
चित कर चूप कियो कारीगर,
चर्खो घड़ उपायो।
सब सेनाण कसर बिना किनो,
समझो सोही सरायो।।1।।
तन तूमण बिच कर्णी को कणियो,
सतगुरु समझ बतायो।
ताड़ी पांच पचीस कर सेठी,
बुद्धि को बन्ध लगायो।।2।।
धर्म भजन थम्भल्या शुद्ध सारण,
सूधे सूत बणायो।
क्षमा पूतली चित चमरख बीच,
शब्द ताकलो लायो।।3।।
राखे मन री माल दया दावण बिच,
सोरी बहु सवायो।
काते सूत प्रेम री पूणी,
तार ताक ले आयो।।4।।
तू कारीगर भारी हरि,
सो इकधारी, जद चख रस आयो।
''लिखमा'' लाभ ध्यान धर लाधे,
इयूं चर्खे चित लायो।।5।।
मारो मन मैलो धोउंगाेे maro man melo dhoungo haalo bhai ganga
मारो मन मैलो धोउंगाेे,
हालो भाई गंगा न्हावण ने।।टेर।।
बंगला देख्या अजब बिहार bangla dekhya ajab bihar jyame nirakar deedar
बंगला देख्या अजब बिहार,
ज्यांमे निराकार दीदार।।टेर।।
हेली ये मान बचन सत मेरो heli ye maan vachan sat mero bhatkat kem
हेली ये मान बचन सत् मेरो,
भटकत केम फिरयो मन कंगर,
तांही में पिव तेरो।।टेर।।
हरि सूं समझ सू लिव ल्याई hari su samaj su liv laai duniya dekhat
हरि सूं समझ सू लिव ल्याई,
दुनिया देखत भूल बनाई।।टेर।।
मात पिता कामण सुत सागे,
मोह माया लिपटाई।
मकड़ी जाल मांड मांही उलज्यो,
फिरे आपदा मांही।।1।।
हरि की भक्ति जगत नहीं जाणे,
करे आपदा कांई।
हर्ख शोक सूं सोही बाधा,
बुद्ध बिन देख चूके डाई।।2।।
संकट पड़े सुद्ध बुद्ध सब बिसरे,
हरि भज हम की डाई।
आवे आयजूरा जम घेरे,
कारी लगे न कांई।।3।।
''लिखमो'' सोवे निकमा जग अंधा,
भजन बिहुणा भाई।
हरि ने भजे सरे सब कारज,
सायब करे सहाई।।4।।
जग देखण आंधा मत हालो jag dekhan andha mat haalo kiyodi kamai
जग देखण आंधा मत हालो,
कियोड़ी कमाई एली जावे जावे रे बीरां।।टेर।।
पांच सात भायां मिल मतो उपायाेे,
मतो उपायो भारी रे भीरा।।1।।
दर्पण ले थारी देहड़ी निर्खो,
रूप देख कांई रीझो रे भीरा।।2।।
पकी धड़ीरा तोल मंगावो,
देहड़ी री काण कढ़ावो रे भीरा।।3।।
घर घर सुर्ता फिरे भटकता,
पर यस्तु मत हेरो रे भीरा।।4।।
गुरु खिंवजी ''माली लिखमो'' बोले,
सदेहि अमरापुर जावो रे भीरा।।5।।
सन्ता बीज कहां से आया santa beej kaha se aaya karo vichar saad
सन्ता बीज कहां से आया,
करो विचार साद विश्वासी,
सांचो सांच बलाया।।टेर।।
कौन बीज से इण्ड भन्या,
कौन बीज से पिण्ड रच्या।
कौन बीज से सिर मुख जडिया,
कौन बाट बरताया।।1।।
कितना मात पिता का कितना,
कितना शीतल छाया।
कितना स्वेत रगत है भेला,
कितना जुगत जावण जमाया।।2।।
क्या कहु, कुण मेरी माने,
अभीया एक उलझाया।
अभीया एक में कौनसा अच्छर,
कौन स्वरोदय आया।।3।।
बीज अमर घट घट में जडिया,
जरा मरण नहींआया।
''लिखमा'' भेद अचम्भो,
पाखण्डी नहीं पाया।।4।।
बार बार समझायो रे जीवड़ा bar bar samjayo re jivada janam gamayo
बार बार समझायो रे जीवड़ा,
जनम गमायो ते इहांई।।टेर।।
स्वामी सिमरूं सुण्डालो,
सारद माता मंमाई।
गर्भ चेतावनी सुख सुं वर्णू,
जीव ब्रह्म री ओलखाई।।1।।
जिवड़ो अर्ज करे हरी आगे,
मेलो मात लोक मांही।
करसूं पुन पाप ने पेलूं,
दया राखसूं देह मांही।।2।।
मात पिता थारे गोत कुटुम्बी,
तू रल जासी उंही मांही।
करड़ा कोल करे दगा में,
भूल जाय लो छिन मांही।।3।।
जल की बूंद पड़ी भीतर में,
बीसूं आंगलियां दीन्हीं सांई।
थम्भ दोय केवल एक बणीयो,
अजब उपायो उण साई।।4।।
हाथ दिया तने पांव दिया है,
नैण दिया निर्खण तांई।
शीश फूल थारे इण्डो चढायो,
पवन पुरुष भेल्यो मांही।।5।।
मृत्यु लोक में जन्म लियो,
अवाज हुई दगा मांही।
तीन नाम भगवत रा लीन्हां,
भूल गयो उन छिन मांही।।6।।
पांचा बरसां हुयो दोजकी,
डोलण लागो घर मांही।
पांच पनरा हुयो पचीसां,
अबे रामजी है कांई।।7।।
डिग मिग नाड़ डोलबा लागी,
पगल्या ठांय टिके नांही।
सब तन थका सिमरण झाली,
अब सिमर्या होवे कांई।।8।।
हुक्म हुयो सायब रे दूतां,
जम आया लेवण तांही।
फिरे दोला बूझण लागा,
ते सुखरत करिया कांही।।9।।
नाम न लीन्हों धर्म न कीन्हों,
दया न राखी देह मांही।
मात पिता ने घणा सताया,
पाप किया निज हाथां ही।।10।।
कण्ठ पकड़ नेे गरडु जूत्या,
दु:ख पाउ हुं देह मांही।
काया नगर में रोलो मचियो,
मार पड़े है गुर्जाई।।11।।
धर्मराज जी री पोळिया,
लेखो मांगे वो सांई।
साच बोल सायब री दर्गा,
तें सुकृत कीन्हों कांही।।12।।
नाम न लीन्हों धर्म न कीन्हों,
दया न राखी देह मांही।
साध सन्ताे री करी ठचेरी,
कलक लगायो हाथां री।।13।।
कीड़ा खावे मुग्दर भारे,
हाथ भरावे थाम्माई।
दु:ख पांउ दोजक में पडियो,
जाबा न दे भगवत तांई।।14।।
हाथ जोड़ने करूं वीनती,
मात लोक मेलो सांई।
कर सूं पुन पाप ने बेलूं,
स्वांस स्वांस सिमरूं सांई।।15।।
भुगति जूण चोरासी जीवड़ा,
सात लोक मेलू नाही।
करस्यो सीला डूंगर उपर,
घास न उगे थां मांही।।16।।
अनन्त सन्ता रे शरणेे आयो,
गुरां पीरां सूं गम पाई।
गुरु खिंवजी ''लिखमो'' जस गावे,
हरि सिमर्या निर्मै थांही।।17।।
भव सागर में भूलो रे अन्धा bhav sagar me bhulo re andha koi karne te
भव सागर में भूलो रे अन्धा,
कोई कारणे ते देह धरी।
भूलो नाम भर्म में उरज्यो,
ओ कांई पहरयो केवारी।।टेर।।
ऐसी फेरे कोई संत सुजाण aisi phere koi sant sujan hiya bich hari mala
ऐसी फेरे कोई संत सुजाण,
हिया बिच हरिमाला।।टेर।।
हरिजन के हृदय बिच माला harijan ke hridya bich mala jaake ghat pind bhaya
हरिजन के हृदय बिच माला,
जांके घट पिण्ड भया उजियाला।।टेर।।
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राम के नाम बिना रे मूरख राम के नाम बिना रे, जल जइयो जिह्वा पापनी, राम के नाम बिना रे ।।टेर।। क्षत्रिय आन बिना, विप्र ज्ञाण बिना, भोजन मान ...