ये माया तेरी बहुत कठिन है राम । टेर।
माया तेरी बहुत कठिन है राम maya teri bahut kathin hai Ram
घूमतड़ा घर आवो आवो जी मोरे प्यारे गजानन्द ghumtada ghar aao aao ji more pyare gajanand.html
घूमतड़ा घर आवो,
आवो जी मोरे प्यारे गजानन्द ।।टेर।।
मूसे असवारी रामा गणपत आवो,
संग में रिद्धि सिद्धि लावो।।१।।
नंदीये असवारी रामा शिवजी पधारो,
संग में पार्वती लावो।।२।।
ब्रह्मा भी आवो विष्णु भी आवो,
संग में लावो जी सरस्वती।।३।।
रामा भी आवो सावरांं लछमण आवो,
संग में सीता जी को लावो।।४।।
बाई मीरांं के प्रभुु गिरधर नागर,
चरणों में शीश नवाऊ नवाऊ।।५।।
कोई पीये राम रस प्यासा राम रस खासा है koi piye Ram ras pyasa Ram ras khasa hai
कोई पीये राम रस प्यासा
राम रस खासा है जी
गगन मण्डल से अमरत बरसे
उनमुन के घर वासा ।टेर।
शीश उतार चरण में धर दे
करै ना तन की आशा
जो भी पीये वो जुग जुग जीये
कबहु ना होय निराशा ।1।
मोल करे तो थके दूर से
तोलत टूटे स्वांसा
इतना महंगा अमरत बिकता
जहर डूबा रही माशा ।2।
इण रस काज नृप भया योगी
छोडया भोग विलासा
अधर सिंहासन बैठे रहते
भस्म लगाई उदासा ।3।
गोरखनाथ भरथरी रसिया
और कबीर रैदासा
गुरु दादू परताप से
पी गये सुन्दर दासा ।4।
लख चौरासी में भटकत भटकत आण मिलीया गिरधारी lakh chorasi me bhatkat aan miliya girdhari
लख चौरासी में भटकत भटकत
आण मिलीया गिरधारी
अबे मारी काया आय सुधारी ।टेर।
गुरु शास्त्र के शरणे आयो
लागी लगन हमारी
पंची करण पढ़ कर देख्यो
आतरम अनुभव भारी ।1।
पांच कोस और सात भौम का
खट शट शरीर है
ज्यारी चौवदा लोक तीन गुण प्रस्यां
सौला सुन अधी मारी ।2।
आला पींगला सुखमण
समज्या प्रगती न्यारी
अन्त करण खोल समजाया
चित, मन, बुद्धि, अहंकारी ।3।
सतगुरु मिल्या सायरा मलीया
धोंका नहीं लगारी
लाडू नाथ अभेपद पाया
तोड़ी भ्रम अडारी ।4।
ये तो समदर भरिया भारी ज्यामे नाय सके नर कोई ye to samdar bhariya bhari jyame naay sake nar koi
ये तो समदर भरिया भारी
ज्यामे नाय सके नर कोई ।टेर।
समदर सात बताया
वस्तु मोल अमोलक पाया
ज्यों कोई नाया सुखसागर में
चोरासी कट जाई ।1।
उण सागर में हीरा मोती
गुरु बिन कुण प्रसावे
कृपा करी गुरु देवजी
माने पार लगावे वोई ।2।
इण समदर में है गुल क्यारी
जिन को देख मन भली विचारी
दुरमत गयी भाग
सुमती की राय बताई ।3।
समदर नाया उमंग घर पाया
सतगुरु सेन बताई
लाडूनाथ चरण चितलाया
सुरत ऊगम गर पावे ।4।
मनख जन्म का दो दिन रहग्या आखीर चौरासी में जावे ओ manakh janm ka 2 din rahgya aakhir chorasi me jave
मनख जन्म का दो दिन रहग्या
आखीर चौरासी में जावे ओ
मन गुरु सरण में आये ।टेर।
लख चौरासी में भटकत भटकत
सन्ता सरणें आवे
भली करी मारा सतगुरु दाता
अमर पट्टो फरमावे ।1।
बगला के जोड़े हंसों बेठो
बगला में बगलो कुवावे
नाडुलियों में मछीया चुगता
खूब माने मातो चुगावे।2।
पारस के संग लोहा अड़ीया
लोहा ने पारस बणाये
जम राय का रंग महल में
ओ मन अबे नहीं जावे ।3।
शंकरनाथ मिल्या गुरु पुरा
भुल्या ने रााह बतावे ।
लाडुनाथ समज कर परख्या
हेर हीरा घरे लावे ।4।
पणीयारी हो जा तैयार बेवड़ो खाली आसी गणी पस्तासी panihari hoja taiyar bevado khali aasi gani pachtasi
पणीयारी हो जा तैयार
बेवड़ो खाली आसी
खाली आली ये
गणी पस्तासी ।टेर।
संत जुगम जागी
सरिया दे कुमारी है
औरी जागा पेलाद कुवार
संग रतना जागी ।1।
सीता रम्बा
ओलिया जी जागी है ।
औरी जागा हरि चन्द राव
संग तारा जागी ।2।
राधा ये रुकमण
कुंताजी जागी हैं
औरी जागा जेटल दे जी राव
संग पंचोली जागी ।3।
मिरा मेगडी
सुलका दे जी जागी है
औरी जागा बलीचन्द राव
संग सज्या जागी ।4।
रावल रुपा
जेसल तोला जागा है
औरी जागा पंचम रा पीर
संग डाला जागी ।5।
गोपीनाथ माने
सतगुरु मीलीया है
गुण गावे शंकर नाथ
कट जावे चोरासी ।6।
हरि ने सीवरलो वारम्बार साधु भाई मारगीयों तो सोरो गणो hari ne sivarlo barmbar sadhu bhai margiyo soro gano
हरि ने सीवरलो वारम्बार साधु भाई
मारगीयों तो सोरो गणो ।टेर।
कटासु आयों मानवी
जाणों कुण से मुकाम
सपना रूपी संसार में वो भाया
तरणो तो दोरो गणो ।1।
पीछम से आया सुदरी
जाणो उगम क्षाम
एक पलक माने राख से
प्यारी सरणे तो गुराजी तणो ।2।
संग करलो सायबा
फेरा फर लो सात छोड़ो मती रे
भकमी बार में मारा
सायबा थारी मने भी घणो ।3।
सुण सुदरी व्याव की
परणीया चोरासी लाख
अबके तो थारे संग रमीयाये प्यारी
अणी
सेज को अन्दगणो ।4।
गोपीनाथ गुरु बेटीया
लगन लिखया परभात
शंकरनाथ माडो जीतया
प्यारी पायो पीयजी गुरु जी तणो ।5।
भक्ति को फल उचार सुणज्यों कोई भुलो मती bhakti ko fal uchar sunjyo koi bhulo mati
भक्ति को फल उचार सुणज्यों
कोई भुलो मती ।टेर।
नावे धोवे पाठ वृत करता
जाय हरि के मन्दिर पग धरता
जॉको उच्च कुल अवतार
मुख पर सोवे रूप अती ।1।
धन बाटे तो धन फल पावे
धरा अपरे नाम कमावे
नरसी ने किया विचार
जाके मायरो भरयो अती ।2।
ज्वालामुखी जपे जत प्राणी
जाय जगन में धरणी माणी
पार्वजन्म जरूर राजा की
पदणी मिले अती ।3।
धावे धूम करे गुरु सेवा
जीवत भोगे मिश्री मेवा
भरीया ही मोक्ष हो जाय
वाकी चोरासी की छुटे गती ।4।
गोपीनाथ मिलया गुरू देवा
शंकर नाथ करे गुरु सेवा
सतगुरु ने सोर पर धार
और आसरो लेवो मती ।5।
थाने जाणीयां किरतार लीला रचाई ज्यारी अपरमपार thane janiya kirtar leela rachai jyari aparampar
थाने जाणियां किरतार
थाने जाणीयां किरतार
लीला रचाई ज्यारी अपरमपार ।टेर।
आसमान में सूर्य रचायो
तपता तेज अपार
गटत बढ़त था चन्द्र रचाया
तारा लख हजार ।1।
मक्का में महमद कुआया
मथुरा मोहन सार
मक्का में था बकरी चराई
मथुरा गऊ हजार ।2।
मक्का मदीना आप बिराजो
बसीयों सागर पार
मथुरा मोहन राम अयोध्या
रोशन किया अपार ।3।
दो ही दीन था अलग बणायों
हिन्दु मुसलीम जार
अलग भेद माने वो
नर डुबे काली धार ।4।
एको ब्रह्म दुनीया नाशत्ति
जाणे जाणन हार
तन मन लेऊला वार था पर पांच तत्व की पुतली tan man leu la var tha par panch tatv ki putli
तन मन लेऊला वार था पर
तन मन लेऊला वार
पांच तत्व की पुतली या
अजब गड़ी किरतार ।टेर।
आंख नाक मुख कान बणया
बाजा बाजे अपार
जीणी जीणी मदुरी वाणी
सुणे कोई ससीयार ।1।
हाथ पांव मजबुत बणाया
रजा बणाया चार
अपणी अपनी जागे उपरे
रहता है हुसीयार ।2।
आठ कवल था गजब बणाया
द्वादश अजंपा सार
नौ नाडि और कोटा बोईतर
दश बणाया दार ।3।
दसवे द्वारे दफतर बणया
रोशन तकीया चार
तीन तकीयां पर राणीया विराजे
चोथा पर किरतार ।4।
कहां तक वरणु कहां तक धाऊ
कब तक पाऊ पार
लाडु नाथ का सुन में रहणा
आया मजा अपार ।5।
घरे पधारो गुरुदेव उतारू हर री आरती ghare padharo gurudev utaru har ri aarti
घरे पधारो गुरुदेव
उतारू हर री आरती।टेर।
गुरजी तनड़ा की
मैं लावु हर के बातिया
मनड़ा रो तेल पुराय
उतारू हरकी आरती ।1।
सुरती नुश्ती की
मेंलु बातियाँ
प्रेम की जोत जगाय
उतारू हर की आरती ।2।
गुरु मारा असंग जुगारो
मैं भटकीयो जी
अबके माने लिदो चरणा ये लगाय
उतारू हरकी आरती ।3।
गुरु मारा नाव
धर्म ने नरबे जाणीयो
कदी ने भुलु दीना नाथ
उतारू हर की आरती ।4।
भाया सुणो समयो
जो धर्म ने धावज्यों
शंकर नाथ भाके सत परवाण
उतारू हरकी आरती ।5।
पुरण भाग मिल्या अविन्यासी अबे मारी खेती नेपे आई puran bhag milya avinashi abe mari kheti nepe aayi
पुरण भाग मिल्या अविन्यासी
कृषर्ण खुब लीखाई
अबे मारी खेती नेपे आई ।टेर।
पांच बीगा की पाटी सुपी
क्यारीयां पचीस लीखाई
काम क्रोध, मद, लोभ, अंखारा
प्रगति आकाश की थाई ।1।
ओहग बीज अरीयों धरणी में
तेज तुर्य के माई
भुक, प्यास, आलस, निद्रा,
मृत्यु परगती, अगनी की थाई ।2।
सोहंग से उपनी आसा
कली-कली लेराई
छल, बल, हलण, चलण,
बोलण, प्रगती पावन की पाई ।3।
आकार मुकार और ओऊंकारा
ऊरद मात्रा बाई
हाड,मास,रूम चाम नाडि
पगती पृथ्वी की परकाई ।4।
फल पाका वाने हरीजन चारवा
नुगरों ने गम नाई
लाल मुत्र रंगत पसीना
वीर्य जल को जोत सुआई ।5।
ज्यासे ऊगा वाई जाय पुगा
अब कुछ धोका नाहीं
शंकर नाथ छाबा भर लाया
खरीदो सन्ता भाई ।6।
लोकप्रिय पोस्ट
-
दया करी मेरे सतगुरु दाता, गेला बताया मुक्ति का, साधू भाई काम कठिन भक्ति का ।।टेर।। सांपड़ झूल न शोभा बतावे, लाम्बा काड़े टीका। दया धरम थारा...
-
सांवरिया तेरा काज समझ में नहीं आया, जो काई काज समझ कर बैठा। वो ही अमर पद पाया ।।टेर।। धर असमान पवन और पाणी, इगन बणाया तुम कैसे । चांद सूरज द...
-
मारे गरूदेव घर आया सा, आणन्द हिया अपार ।।टेर।। मारे गरूदेव घर आया, मारे हरदे आणन्द छाया। मारा भरम करम सब भागा सा, ऐसी पड़ी सुमार ।।1।। मार...
जल जइयो जिह्वा पापनी राम के नाम बिना रे JAL JAIYO JIVHA PAPNI RAM KE NAAM BINA RE
राम के नाम बिना रे मूरख राम के नाम बिना रे, जल जइयो जिह्वा पापनी, राम के नाम बिना रे ।।टेर।। क्षत्रिय आन बिना, विप्र ज्ञाण बिना, भोजन मान ...