सतगुरु अजब सुणायों ज्ञान नोपत नरबे की बोले जी satguru ajab sunayo gyan nopat narbe ki bole ji

 

सतगुरु अजब सुणायों ज्ञान

नोपत नरबे की बोले जी


पाँच ततव की बणी काया

उपर रंग सुरंग भराया

नौ दरवाजा गजब बणायां है

ताला मारा संत गुरु खोले ओ ।1।


प्रथम द्वारे गुणपत पाया

सुकर द्वारे हीरा बर सायौ

भर छड़ावा मोतियों की लाया है

हीर कोई हरी जन भोले हो ।2।


ले माणक उगम घर आया

सील तेज का पता लगाया

पावन पुरुस का पकड़ियाँ पाया है

चतर कोई आ वीद खेले ।3।


ओ दक्षीण आरे दर्शन पाया

पिछम द्वारे ग्यान सुणायों

हो गया अब मन का चाया है

सुरत मारी सुख भर जुलेओ ।4।


दसवे द्वारे अब चल आयो

हद बेहद बीचे आसण पाया

जेटूनाथ जोगा राम पाया

पार माने किेया पेले हो ।5।

उमावो लागे रे अमर लोक रो जाणो भायों विकट मजधार umavo lage re amar lok ro jano bhaya vikat majdhar

 

उमावो लागे रे अमर लोग रो

जाणो भायों विकट मजधार 

सादुड़ा पुगा अपणी गोत रा ।टेर।


बडला सलगावो भाया पीपला

सांदो भायों सरवररिया री पाल

धरमीड़ा जावे जी फूल विरोलता

पापीड़ा पर पड़े बडकी डाल ।1।


आबुसण पहरावो मुखमल मोचडीयों

सन्ता को करो संतकार

 ऐ पुष्प बेबाणा वारा बेठणा

पापीडा रे खाँडा वाली धार ।2।


जीवड़ा मत मारो मारा  भायड़ा

मती ताको ओरी पराई नार

मदंडो माणो तो नरगा जावणा

थाने मारा गुरा जी की आण ।3।


कन्या परण वो धर्म धारणा

मात पिता को पुत्र अज्ञाकार

सरवण जैसा पुत सुहावणा

बेतरणी से उतरे पेली पार ।4।


पुरब द्वारे थाकां बैठणा

चित्रगुप्ता करे संतकार

परवाना सुणलो जी जेठु नाथ का

बाच देखो गुरड़ पुराण ।5।

सतगुरु दीदी शब्द की चोट अबे माने आण जगाया जी satguru didi shabd ki chot abe mane aan jagaya ji

 

सतगुरु दीदी शब्द की चोट

अबे माने आण जगाया जी ।टेर।


लख चौरासी में भटकत

फीर फीर हो गया काया जी 

नर तन पायो जुग में आयो

माता मारी लाड़ लड़ायो है ।1।


कृपा करी गुरु देव 

सिर पर हाथ धरायो जी 

प्रथम सेवा माता पिता की 

शीर रण परायोजी ।2।


तीजी सेवा ईश्वर की करो 

जीरो फल सवायो जी 

अमर लोक का खुले दरवाजा

गुरा यु फरमायों जी  ।3।


शंकर नाथ मीलीया गुरु पुरा

हो गयो मन चायो जी

जेटु नाथ समज कर 

अबके पकड़ पायो जी ।4।

भक्ति है पारस खान सुणज्‍यो कोई छोडो मती bhakti hai paras khan koi chodo mati

 

भक्ति है पारस खान

सुणज्‍यो कोई छोडो मती ।टेर।


लोहा समान सभी संसारा

पारस है मेरे गुरु दातारा

जागा जाका भाण

पारस से हो गई एक मती ।1।


लोहे का कंचन कर

द्वारा नगर माये हुआ उजारा

वाने सोज्या संत सुर ज्ञान

माने कमी न दिखे पावरती ।2।


संत गुरु सायब सोनी बन आया

पकड हाथ एरण चढवाया

शक्ति ने बनायों हार

शिव के बनाई लड़ा अती ।3।


हाथ में मारे सोवे अंगोठी

नाका नंतरी सोवे मोटी

नेण में सुरमों सार

मुखड़ा री चुपा भुलो मती ।4।


नथड़ी में नग राता पीला

हरा सफेद श्याम है ।

काला श्याम में सुरत सगाय

मारे ओरी नग है अटापटी ।5।


गोपीनाथ माने भलिया खोजी

शंकरनाथ पर हो गई मरजी

दुर्बल पर दया विचार

तुम भवसागर भैवो मती ।6।

चार खान में बहुत दुःख पाया चुबती धारा अणीसा char khan me bahut dukh paya chubti dhar ganisa

 

चार खान में बहुत दुःख पाया

चुबती धारा अणीसा 

गुरु मिलिया

गोपीनाथ धणीसा ।टेर।


पंड खान परमार्थ कारण 

भेजीया श्याम धणी सा

 विषय वासना में भुल गयी है

माय आन खडी सा ।1।


अंडखान की पशु जुण में

सही वीपता घणी सा

जन्म जरणी का दूध नहीं पीया

डरपोक से पालना करीसा ।2।

 

जडखान बनास पती कहिये

वा भी सेल करीसा 

डीमुल काटता वाने 

मुख बना बोले कुणी सा ।3।


उदमुद खान में पाव पसारीया

वा भी संगत करी सा

कदीक जलचर कदीक थलचर

नत नई देह धरी सा ।4।


चारखान चौरासी माये

फीरीया टेम घण्टी सा 

मेराा करीज बार निकालया

गीता की साख भरीसा ।5।


सत संग कर योगस इकले

हाथ में आई मन्टी सा

शंकर नाथ रेवे गरू आग्या

होवेसा कृपा घणी सा ।6।

भक्ति है कालो नाग सुणज्यो कोई पकडो मती bhagti he kalo naag sunjyo koi pakdo mati

 

भक्ति है कालो नाग

सुज्यो कोई पकडो मती ।टेर।


सपल पीयाला वांका वासा 

चवदा लोक करे सब आसा

फण उपर पृथ्वी ने धारा

ज्या उपर इच दी रचना अति ।1।


पन्‍द्रा करोड़ा नाग पकडीया

पाँच करोड जामु जड पडिया

पाँचा ने प्रागियो नाग

पाँचा की हो गई एक मती ।2।


अकीस करोडा नाग पकडीया

सात करोड जामु जड पडीया

साता ने खा गयो नाग

साता की हो गई एक मती ।3।


सताईस करोडा नाग पकडीया

नो करोड जामु जड़ पडीया

नोवा ने खा गयो नाग

नो वाकी हो गई एक मती ।4।


छतीस करोडा नाग पकडीया

बारा करोड जामु जड पडीया

बारा ने खा गयो नाग

बारा की हो गई एक मती ।5।


पांच सात नो बारा मलिया

शंकरनाथ वामे जा भलिया

सतगुरु को आधार 

छोडुतो होवे और गति ।6।

परस्या जो पूर्ण वीया नुगरी क्या जाने संसार parsya jo purn viya nugari kya jane sansar

 

परस्या जो पूर्ण वीया हो जी

नुगरी क्या जाने संसार 

भरम लाजो ज्यारा 

नै ही खुल्या हो जी ।टेर।

 

आज सैया सतगुरु भेटीया है जी

दरस्या नूर अपार

तरबीणी रा रंगमहल में है जी

अनहद हुवी रणुकार ।1।

 

बेठा हो गुरुजी हर की हाटड़ीया हो जी

करू मारा दुःखड़ा री बात

मनमाती माने रोकिया हो जी

आड़ी फिर गयी कुमता नार ।2।

 

मन को पोया गुरु गम ध्यान में हो जी

पोता लागी है बार 

कुमता सुलकणी फेरी फरे हो जी

वाने लीदी ललकार ।3।

 

लेगीया गुरुजी ऊजम महल में

खोल्या बजड कीवाड

दसवे द्वारे सामा जाव्या है जी

जी पद अपरम पार ।4।

 

केदू नीसाणी उण देश री होजी

झिलमि‍ल ज्योति प्रकाश

सैद बरण मारो सायबो होजी

रूपन रेखा लगा ।5।

 

गोपीनाथ गुरु भेटीया हो जी

लेगया माने आलम के दरबार

शंकरनाथ अब देश में

पाया हीरा अपरम्‍पार ।6।

भजन कीया ज्यो नर अवरया तरग्या संत अपार bhajan kiya jo nar avarya targya sant apaar

 

भजन कीया ज्यो नर 

अवरया हो जी

तरग्या संत अपार

दूरमत ने अलगी टालज्यो हो जी ।टेर।

 

आवो सैया मंगल गावा

अपना गुराने मनाये

चरणा की सेवा करा हो जी

अमृत लेवा गठका ।1।

 

आवो अलाई बाई पोगला है जी

आवो सुकमण नार,

सुरता राणी ने संगमे लावुज्यों है जी

मिल कर गावा मंगला चार ।2।

 

बकड़ी सेरया सैया भौगणा हो जी

रिज्यों गुणी होशियार

घार चुकेतो नीचे गीर पड़े हेजी

तोड़ो मती थे तार।3।

 

पांच कोए को सैया भारी चालनों है जी

बैठो मती हिम्मत हार

आगे बिराज्या गुरु आपना है जी

तन मन लेवाला वार ।4

 

गोपी नाथ गुरु भेटीया

शब्द दीया निज धार

शंकरनाथ शरणे आव्या

दूरबल लागा लार ।5।

मनवा छोड़ जगत को हेत अपना वचन संभालो जी manva chod jagat ko het apna vachan sambhalo re

 

मनवा छोड़ जगत को हेत

अपना वचन संभालो जी

बचन संभालो रे

अवसर आयो निरालो रे ।टेर।

 

नौ नौ मस गर्भ धर धायो

आखीर जीव बहुत दुःख पायो है

लीयो हरि को नाम

राम जब कीयो संभालो रे।1।

 

आय हरिजी वचन पुकारे

कहो जीवन काई दुःख थारे है

आना हो तो बार एक

 मेरा वचन पालो रे ।2।

 

पहला हरि का नाम पुकारो

दुजी दिल में दया विचारो

दसवो हीसो काढ़ कर

खजाने रालो रे ।3।

 

आय हरिजी वचन जेलाया

जब वचन मनवा हरसाया

शंकर नाथ परमारथ कारण

बायर चालो रे ।4।

मनवा अवगत अलंख अपार धार ने चुके मती रे manva avagat alakh apaar dhar ne chuke mati re

 

मनवा अवगत अलंख अपार

धार ने चुके मती रे 

चुके मती रे

वीस्ये में जुके मती रे ।टेर।

 

इस दुनिया का अजब तमाशा

अबके मुझे हुआ प्रकाश है

छोड़ जगत को हेत

चरण में चीत मन दीज्ये रे ।1।

 

माता पिता अर कुटुम्ब कबीला

सगा सोई और कपटी चेला है

भीड पडे जद भागेे वातो 

यारी फीकी रे बातो यारी फीकि रे ।2।

 

लख चौरासी में फिरता आया

धर धर रूप बहुत दुःख पाया है,

कुंजर से कीड़ी बरणाये

कदीक माने मास भंकती रे ।3।


अबके अवसर भलभल आया

मारा गुराजी मुझे आण जगाया है ।

 काटीया करम का फंद

सुरत मारी सुक भर सुती है ।4।


गोपीनाथ मिलिया गुरुदेवा

समता कर संरण गत लेवा है ।

 शंकर नाथ याद अंत की

में केवु सब रीती है ।5।

धन ज्यारो भाग भाया पूजो समाधि हो जी dhan jyaro bhag bhaya pujo samadhi

 

धन ज्यारो भाग भाया

पूजो समाधि हो जी ।

जन्म मरणरी भरांत मीटा दी

आतो रीत भाया द अनादी हो जी ।टेर।

 

प्रथम परसाल शीषु जोगी खोली हो जी,

गंगा गोरज्या पारबती राई जादी,

राक्षस भोम श्रंराधर कांपी हो जी,

सुर तेतीसा की मेटी वीयादी ।1।

 

दूजी परसाल सतयुग माये खोली हो जी,

सरीयादे प्रहलाद रतना दे रटना लागी,

हिरयाकुश्यप ने हाथा सू हनिया हो जी,

सत्य धर्म की पाव बंधा दो ।2।

 

तीजी परसाल दुवापुर में खोली हो जी ।

बीलुचन्द हरिचन्द तारादे त्रीवादी,

श्री राम चन्द जी तो रावण ने मारया हो जी

पड़दे पधारिया सीता सत्यवादी ।3।

 

चोथी परसाल त्रेता में खोली हो जी,

देरवासा पांडु द्रोपती रटनां लागी,

चकर चलाये सीसपाला ने मारया हो जी

कस कला वे हुवा बड़ भागी ।4।

 

पांचवी परसाल कुल जुगमाये खोली होजी,

सुकराचारी बूल सज्यादे सत्येवादी

 पापी नुगराने दाता द्रस्टी सु हनीया हो जी,

रावला भगताने धापीयां हीमत बढ़ादी ।5।

 

योगतणाजी मेरम लीख गाया होजी,

 गोपी नाथ बीराज्या ब्रम गादी,

शंकरनाथ चरणा चीत लागा होजी

माके ग्रास उठा की ।6।

लागे जी माने सब जुग खारा हो शरणे जाऊ सन्त की laage ji mane sab jug khara ho sharne jau sant ki

 

लागे जी माने

सब जुग खारा हो

शरणे जाऊ सन्त की

करदे भव पारा हो ।टेर।

 

कोई हंसता फिरे कोई मस्ता फिरे

बीरल्ये की धारा हो

संत मिले प्रमारती

पावें अमरत धारा हो ।1।

 

नगटा नुगरा नेम तोड़ा

भादु भारा हो

संत मिले साहेब का बन्दा

करदे न्यादा हो ।2।

 

भाग अगामी मिलीया सांमी

माने डुबत तारी ओ

नीतर होता खुर खन्जरा

लादे वजन उपरा हो ।3।

 

छीलरीयाने मच्छी चुगता

देखीया अपारा हो

ऊडता हंस की पाख पकड़

प्रेम हंस पारा हो ।4।

 

गोपीनाथ माने पुरा गुरू मिलीया

डुबत तारीया हो

शंकर नाथ समझ मन मेरा

गढ़ में हुआ उजारा हो ।5।

हारे संत मारे आया ओ माने दर्शन दे haa re sant mare aaya o darshan de bharam

 

हांं रे संत मारे आया ओ

माने दर्शन दे 

मारा भरम मिटाया ओ

संत मारे आया हो ।1।

 

संत आया मंगल गाया

प्रसब लासना लाया हो

कीट का माने भरग बणा

माने फूल चुसाया हो ।1।

 

हरिया पीला श्याम सुकेता

लाल गुलाबी लाया हो

भाती- भाती कर जोविया

भीन्न- २ समझाया हो ।2।

 

प्रतम फुल प्रसता में

दो विश्वा परे आया हो

दुजा फूल प्रसता

चारा पर आया हो ।3।

 

तीजा फूल की केवुं ओ मेमा

विश्व आठ रोकाया हो

चोथा फूल प्रसता

दुवा दस पाया हो ।4।

 

फुल पांचवे सोना उपर

शील तेज गरनाया हो

शंकर नाथ दर्शन कर

ऊगम गढ़ पाया हो ।5।

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