सतगुरु दीदी शब्द की चोट
अबे माने आण जगाया जी ।टेर।
लख चौरासी में भटकत
फीर फीर हो गया काया जी
नर तन पायो जुग में आयो
माता मारी लाड़ लड़ायो है ।1।
कृपा करी गुरु देव
सिर पर हाथ धरायो जी
प्रथम सेवा माता पिता की
शीर रण परायोजी ।2।
तीजी सेवा ईश्वर की करो
जीरो फल सवायो जी
अमर लोक का खुले दरवाजा
गुरा यु फरमायों जी ।3।
शंकर नाथ मीलीया गुरु पुरा
हो गयो मन चायो जी
जेटु नाथ समज कर
अबके पकड़ पायो जी ।4।
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