मन रे सतगरू कर मेरा भाई सतगरू बिना संगी नहीं तेरो man re satguru kar mera bhai sangi nahi tero

 

मन रे सतगरू कर मेरा भाई।

सतगरू बिना संगी नहीं तेरो,

अन्‍त समय के माई।।टेर।।

 

महाकष्‍ट जब पड़ेगो तेरे,

कोई न आडो आई।

मात पिता त्रिया सुत बंधू ,

सब ही मूण्‍डो छुपाई।।1।।

 

धन दौलत और महल मालिया,

सभी धर्या रह जाई।

जम के दूत पकड़ ले जावे,

जूता खातो जाई।।2।।

 

राज तेज की चले न हिमायती,

देवा की चाले नाही।

गुरू को देख दूर खड़ा होवे,

भाग जावे जमराई।।3।।

 

सतगरू मिले तो बन्‍ध छुड़ावे,

फिर निरभे करे तॉई।

अचलराम तज सकल आसरा,

चरण शरण सुख पाई।।4।।


मैं लाई रे बाटका में गाल खाले खीचड़लो mai laai re batka me gaal khale khichadlo

 

मैं लाई रे बाटका में गाल,

खाले खीचड़लो।

करमा बेटी जाट की,

थू कई सोचे नन्‍दलाल, खाले...।।टेर।

 

पुजारी थारा लागे दादोसा,

मारा वे तीरथ करबा जावे,सांवरा।

सेवा थारी धणी में तो साजा,

धणी माने भोलावण दे जावे।

आई थारा मंदरिया में,

मारा घर सूं चाल,खाले।।1।।

 

नित बाटा जोवा, थारा पगलिया धोवा,

क्‍यो ना खीचड़ खाबा आवे।

थू कांई खावे अठे क्‍यो ना आवे,

कई दादोसा री याद सतावे।

भूखा मरता रा कानजी वो,

थारा चप जासी दोनों गाल,खाले।।2।।

 

कांई शंका करो, मांसू लाज्‍या मरो,

मैं बाहर खड़ी हो जाऊ।

जीमण री घड़ी थारे सामे खड़ी,

थारे धाबला रो परदो लगाऊ।

रूस्‍या होतो मानजो थे,

बृजवासी नन्‍दलाल,खाले।।3।।

 

अरजी सुणी सांवरियो धणी,

सुख सेज छोड़कर आयो।

धन भाग थारो करमा नाम थारो,

थारो खीचड़ सांवरो खायो।

भोला सा भगता सांवरा,

कहिये मदन गोपाल,खाले।।4।।

तेरो जनम सफल होई जाय नर राम भजो चित लाय tera janam safal hoi jay nar Ram bhajo chit laay

 

नर राम भजो चित लाय,

मिल जाये सांवरियो।

तेरा मानुष जनम अनमोल रे,

तेरो जनम सफल होई जाय।।टेर।।

 

मानुष तन जोबन धन,

बार बार नहीं आवे।

मनवा राम भजो सब काम तजो,

ऐसो अवसर फेर नहीं आवे।

क्‍या सोच समझ हारे बावला,

क्‍या विरथा जनम गमाय।।1।।

 

क्‍या है तेरा क्‍या है मेरा,

चलाचली का खेला।

रेण पडियो ज्‍यू लिया बसेरा,

सब मिल हो गिया भेला।

मनुष्‍य जनम सराय है,

ज्‍यूं नर अंत अकेलो जाय।।2।।

 

जीवन सोना एक खिलौना,

इक दिन होवे टुकड़ा टुकड़ा।

काल बली तुझे पकड़ ले जावे,

तोड़ देवे थारा मुखड़ा।

बिना भजन यमराज तेरी,

कैसे करेगा सहाय।।3।।

 

संसार असार है सार एक है,

नाम हरि का प्‍यारा।

रहो नेम से रोज प्रेम से,

भवजल होवे पारा।

कहे घनश्‍याम राम रटन से,

चरण पदारथ पाय।।4।।

असली घर ने भूल गयो रे अन्‍त समय पछताय रे asali ghar ne bhul gayo re ant samay pachtay re

 

असली घर ने भूल गयो रे,

अन्‍त समय पछताय रे।

है तो वो को वोही,

मन कह कह थाको तॉई रे।।टेर।।

 

मैं तो जाणू रे थू राम भजे रे,

बक मारे जक होई।

इण करमा सूं जाण पड़ेला,

चौरासी की खाई रे।।1।।

 

मैं जाणू रे थू बैठो मन्‍दर में,

आंख्‍या मीच ने दोई।

थू तो निकले न्‍यावरिये नाटो,

जाई परोई जोई रे।।2।।

 

मैं जाणू थू नवी करी रे,

कीदी कमाई खोई।

मूरखो की संगत में बैठ के रे,

खो दीनी थू  दोई।।3।।

 

मैं केऊ रे दिन रियो थोड़ोई,

थू केवे गणोई।

मैं तो केऊ या भूल भरमना,

थू केवे मजो गणोई।।4।।

 

मान मान नर चतुर मनावे,

बण बण ने थोरोई।

इतरो कहूं थू आइजे अब,

नितर जाइजे परोई।।5।।

ब्रह्म ज्ञानियां रो आयो रे धड़ीन्‍दो भेद वादियां री छाती धड़के brahm gyaniya ro aayo re dhadindo bhed vadiya ri chati dhadake

 

ब्रह्म ज्ञानियां रो आयो रे धड़ीन्‍दो,

भेद वादियां री छाती धड़के।

मारा भाया नुगरा की छाती धड़के।

डरपो मती वा, वा डरपो मती,

चेतन घर में ले जास्‍या डरपो मती।।टेर।।

 

बालमिकी वशिष्‍ठ व्‍यास सुखदेवजी।

ब्रह्म ज्ञान की तो बांधी सड़के।।1।।

 

विवेक वैराग्‍य षट सम्‍पति मुमुक्षता।

ज्ञान का साधन बताया भड़के।।2।।

 

श्रवण मनन निदिध्‍यासन तीनों।

तत् त्‍वं शोधन अन्‍तरंग अड़के।।3।।

 

सत चित आनन्द ब्रह्म अखण्डित।

नाम अरू रूप मिटाया हड़के।।4।।

 

अनन्तो ही संत भया है ब्रह्मज्ञानी।

भेदवादियो रे माथे सारा कड़के।।5।।

 

वेद अरू ग्रंथ समृतिया कहे सारी।

गीता अरू रामायण देखो पढ़के।।6।।

 

ओमप्रकाश गुरू मिल्‍या ब्रह्मवेत्ता।

माणक कहे द्वेत तागो तोड़ो तड़के।।7।।

याने कभी न होवे ज्ञान चाहे कितना ही करो बयान yane kabhi na hove gyan chahe kitna hi karo bayan

 

दोहा: भाटा भैंसा चीचड़ा मीन मृग गज काग।

खर घघू बुग चालणी मूस तराजू नाग।।

 

याने कभी न होवे ज्ञान,

चाहे कितना ही करो बयान।।टेर।।

 

भाटा पाणी में नहीं भीगे,

भैंसा खूब डबोवे सींगे।

चीचड़ पय करे नहीं पान।।1।।

 

खुद पीवे नहीं पाणी मीना,

मृगा नाभी सुगंध नहीं लीना।

कुंजर खुद ही करे स्‍नान।।2।।

 

कागा नीर ताल नहीं पीवे,

खर को मिश्री दिया न जीवे।

उल्‍लू ने सूझे नाही भान।।3।।

 

चालणी कण तज राखे भूसा,

सदा ही खाली रहवे मूसा।

बगुला करे मीन को ध्‍यान।।4।।

 

तराजू रहे रीती की रीती,

करता नाग खूब बदनीती।

ओम को इनसे बचा भगवान।।5।।

मनवा सोहं पर धुन धर रे सोहं आप सदा निर्वाणी manva soham par dhun dhar re soham sada nirvani

 

दोहा: सकार प्राण के आवता, हकार जावती बार।

हंस मंत्र हरदम जपे, जीव जीभ बिन सार।।

 

मनवा सोहं पर धुन धर रे।

सोहं आप सदा निर्वाणी,

सांची निश्‍चय कर रे।।टेर।।

 

ब्रह्मा विष्‍णु जपे महादेवा,

जिससे रहत खबर रे।

दस अवतार सोहं को रटिया,

जब पाया वह घर रे।।1।।

 

सभी संतो ने सोहं गाया,

कर कर उनकी खबर रे।

उनको लेय पवन बिच पोया,

वे ही सांचा नर रे।।2।।

 

और नाम उन्‍ही की शाखा,

सोहं जाण जबर रे।

उनके माय आप मिल जावो,

जैसे बून्‍द सरवर रे।।3।।

 

सोहं बिना सार नहीं पावे,

आवागमन न टरे रे।

सोहं अजर अमर अविनाशी,

इनको कर ले थिर रे।।4।।

 

सोहं सतगरू सोहं चेला,

यही धार ले उर रे।

ओमप्रकाश कहे सोहं समझ के,

निडर होय विचरे रे।।5।।

साधू भाई क्‍यो लजावे बाना खाली लोग हंसाना sadhu bhai kyu lajavo bana khali log hasana

 दोहा: बाना धारे संत का, चले दुष्‍ट की चाल।

धोखा देवे जगत को, साहिब खींचे खाल।।

 

साधू भाई क्‍यो लजावे बाना।

बाना तणो भेद नहीं जाणे,

खाली लोग हंसाना।।टेर।।

 

साधू कहावे शर्म नहीं आवे,

सत्‍य कर्म नहीं जाना।

अपनी आप बड़ाई करता,

दूजा को नहीं माना।।1।।

 

भीड़ पड़े नेड़ा नहीं आवे,

देय दूर से काना।

झूठी बात करे नर भोंदू,

निश्‍चय नाही निशाना।।2।।

 

नींच कर्म की नींव लगाकर,

ऊंचा पद की ताना।

सांचा को नर झूठा बतावे,

सही भेद नहीं पाना।।3।।

 

चेला मूंडे लोभ के खातिर,

अपना काम बनाना।

ओमप्रकाश शर्म नहीं आवे,

क्‍यों नहीं रहवे छाना।।4।।

सतगरू आपका दर्शन की माने ओल्‍यूड़ी आवे satguru apka darsan ki mane oludi aave

 

दोहा: विरह सतावे सतगरू, किसविध काढू टेम।

दर्श दिखावो आय कर, करो दुर्बल पर हेम।।

 

सतगरू आपका दर्शन की माने,

ओल्‍यूड़ी आवे।

ओल्‍यूड़ी आवे परमगुरू,

याद गणी आवे।।टेर।।

 

दर्शन आडा पाप हजारो,

आकर फंस जावे।

जन्‍म जन्‍म का कर्म कियोड़ा,

बुद्धि भरमावे।।1।।

 

जो मैं सुमिरण करू गुरां का,

मनवो डिग जावे।

आपके दर्शन बिन,

खाली गीत गावे।।2।।

 

शुभ नजरे जब होवे आपकी,

सुमिरण मन भावे।

सत चित आनन्‍द अविनाशी,

घट घट में दर्शावे।।3।।

 

दीपक बाती पावक कहिये,

ज्‍यामें तेल च्‍हावे।

आप बिना मारा दीपक दाता,

कौन चेतावे।।4।।

 

चतुर स्‍वामी अन्‍तरयामी,

सब कुमति ढावे।

ओम आपकी चरण शरण,

पद रज गंग न्‍हावे।।5।।







आरती सतगरू की कीज्‍यो जी आरती धनगुरू की कीज्‍यो aarti satguru ki kijo dhanguru ki kijo

 

आरती सतगरू की कीज्‍यो जी,

आरती धनगुरू की कीज्‍यो,

पान पतासा मिसरी मेवा,

तन मन धन अलपीजो।।टेर।।

 

चन्‍दन चौक पुराय के जी,

आसण दे दिज्‍यो।

हाथ जोड़ परिक्रमा करके,

चरण धोक दीज्‍यो।।1।।

 

प्रेम का दीपक नियम की बत्तिया,

ज्‍योति झिलमिल ज्‍यो।

प्रेम की नदिया बहे घट भीतर,

आनन्‍द रस पीज्‍यो।।2।।

 

इडा पिंगला जोय जुगत से,

घर सुखमण लीज्‍यो।

सोहं शब्‍द रटो घर भीतर,

गरूजी से गम लीज्‍यो।।3।।

 

अधम उधारण भव दु:ख तारण,

शरणो गह लीज्‍यो।

चतुरदास चरणां को चेरो,

भक्ति वर दीज्‍यो।।4।।

सुरता वो मारा राम से लागी ओ दीनानाथ से लागी surta vo mara Ram se laagi deenanath se laagi

 

झीणो सालू ओढ़ सुहागण,

बीत्‍यो जावे ब्‍याव।

धन जोबन माया पावणी,

जातोड़ा न लागे बार।।1।।

 

परथमी माया जेल में पड़ी मारी हेली,

समझो सुहागण नार।

सुरता वो मारा राम से लागी,

दीनानाथ से लागी।।टेर।।

 

ऊगा जो तो आथसी रे,

फूल्‍या जोई कुमलाय।

चुणिया देवल ढस पड़े रे,

जनमिया जोई मर जाय।।2।।

 

उने परवत उने परवत बचे,

भर्या दरियाव।

ऊंचा चढ़ हर जोविया रे,

कुण कुण उतर्या रे पेली पार।।3।।

 

ऊंची मेड़ी राम की जी,

मांसू चढियो न जाय।

कीजो मारा श्‍याम ने,

मारी बांह पकड़ ले जाय।।4।।

 

नाथ गुलाब मल्‍या गरू पूरा,

मैं चरणा का दास।

उगम नगारो बाजियो रे,

गावे भवानी नाथ।।5।।

साधू भाई गरूजी बतायो घर आगो sadhu bhai guruji batayo ghar aago

सुगरो व्‍हे नर आफत लीदी,

रे नुगरा व्‍हेबा लागो।

नुगरो व्हिया तो प्रथम नहीं पूगे,

रे सुगर नुगर दोई त्‍यागो।।1।।

 

साधू भाई गरूजी बतायो घर आगो,

रहणी रेह रेह लाखो ही मरग्‍या।

करणी कर कर करोड़ो ही खपग्‍या,

रे ठोड़ पतो नहीं लागो,साधू भाई...।।टेर।।

 

भूखो क्‍यू रहवे नर,काया क्‍यू कष्‍टे रे,

धाप जीमबा लागो।

धाप जीम्‍या तो प्रथम नहीं पूगे रे,

भूख धाप दोई त्‍यागो।।2।।

 

चालतो न पूगो नर, दोड़तो न पूगो रे,

ठाम बैठबा लागो।

ठाम बैठ्या तो प्रथम नहीं पूगे रे,

दोड़ चाल दोई त्‍यागो।।3।।

 

जीवत मुक्ति चावे मन मयला रे,

धर्म ध्‍यान संग लागो।

कहे कमाली कबीर सा की लड़की,

चेतन के संग लागो।।4।।

चेला ओगण गाळा गणां देख्‍या वो chela ogan gala gana dekhya vo

 

अवल बाणी कवल छाणी,

अवल का उपदेश है वो जी।

सांच कहता झूठ माने,

ऐसी है संसार।

चेला ओगण गाळा गणां देख्‍या वो जी।।

 

मुख मीठा पण्‍ड झूठा ,

अन्‍तर कपटी काछ लपटी।

अन्‍त खारमखार खार ,

चेला ओगण गाळा गणां देख्‍या वो जी।।1।।

 

हां वो गुरासा हीरा का बोपारी आया वो जी,

हीरा जहाज भर लाया।

संत मल्‍या सोदो करे वो जी,

मूंगे मोल बकाया।

 

सतगरू सायब तार लेवो जी,

है कोई भजन भभेकी,

सतगरू सायब तार लेवो जी।।1।।

 

शिखर माये कंकर भरिया,

पत्‍थर का परवार है वो जी।

पेली खारा पाछे मीठा,

अन्‍त खारमखार, चेला ओगण...।।2।।

 

सतगरू मारा सायर है वोजी,

मैं गलियो का नीर।

कूद पडियो दरियाव में वो जी,

कंचन भया शरीर, है कोई भजन...।।2।।

 

आकड़ा ने अमृत सींचे,

आम कणी विध होय है वो जी।

नीम के नारेल लागे,

ऐसी वस्‍तु जोय,चेला ओगण...।।3।।

 

सतगरू पारस खान है वो जी,

लोहा जग संसारा।

पारस के संग टगी रमे वो जी,

कंचन हो जावे सारा, है कोई भजन...।।3।।

 

बचन गुरां का जेल न जाणे  वो जी,

अजिया का आहारा।

बड़ा से बेबाद करे वो जी,

ऐसी कपट की खान,चेना ओगण...।।4।।

 

सीप सायर में नीपजे वो जी,

नीपजे एकण सारा।

छमकी मारू प्रेम की वो जी,

बीण लाऊ कण सारा, है कोई भजन...।।4।।

 

गुराजी सत धरम ने जेलता वो जी,

मट जावे भरम अंधेरा।

शंख फडिंदा की बीणती ओ जी,

भो भो दास तुम्‍हारा, है कोई भजन..।।5।।

 

आवो चेला बचन जेलो,

खरधर खाण्‍डा धार है वो जी।

देव डुंगरगर बोलिया,

हो जावे भव जल पार,चेला ओगण...।।5।।

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