मनवा छोड़ जगत को हेत अपना वचन संभालो जी manva chod jagat ko het apna vachan sambhalo re

 

मनवा छोड़ जगत को हेत

अपना वचन संभालो जी

बचन संभालो रे

अवसर आयो निरालो रे ।टेर।

 

नौ नौ मस गर्भ धर धायो

आखीर जीव बहुत दुःख पायो है

लीयो हरि को नाम

राम जब कीयो संभालो रे।1।

 

आय हरिजी वचन पुकारे

कहो जीवन काई दुःख थारे है

आना हो तो बार एक

 मेरा वचन पालो रे ।2।

 

पहला हरि का नाम पुकारो

दुजी दिल में दया विचारो

दसवो हीसो काढ़ कर

खजाने रालो रे ।3।

 

आय हरिजी वचन जेलाया

जब वचन मनवा हरसाया

शंकर नाथ परमारथ कारण

बायर चालो रे ।4।

मनवा अवगत अलंख अपार धार ने चुके मती रे manva avagat alakh apaar dhar ne chuke mati re

 

मनवा अवगत अलंख अपार

धार ने चुके मती रे 

चुके मती रे

वीस्ये में जुके मती रे ।टेर।

 

इस दुनिया का अजब तमाशा

अबके मुझे हुआ प्रकाश है

छोड़ जगत को हेत

चरण में चीत मन दीज्ये रे ।1।

 

माता पिता अर कुटुम्ब कबीला

सगा सोई और कपटी चेला है

भीड पडे जद भागेे वातो 

यारी फीकी रे बातो यारी फीकि रे ।2।

 

लख चौरासी में फिरता आया

धर धर रूप बहुत दुःख पाया है,

कुंजर से कीड़ी बरणाये

कदीक माने मास भंकती रे ।3।


अबके अवसर भलभल आया

मारा गुराजी मुझे आण जगाया है ।

 काटीया करम का फंद

सुरत मारी सुक भर सुती है ।4।


गोपीनाथ मिलिया गुरुदेवा

समता कर संरण गत लेवा है ।

 शंकर नाथ याद अंत की

में केवु सब रीती है ।5।

धन ज्यारो भाग भाया पूजो समाधि हो जी dhan jyaro bhag bhaya pujo samadhi

 

धन ज्यारो भाग भाया

पूजो समाधि हो जी ।

जन्म मरणरी भरांत मीटा दी

आतो रीत भाया द अनादी हो जी ।टेर।

 

प्रथम परसाल शीषु जोगी खोली हो जी,

गंगा गोरज्या पारबती राई जादी,

राक्षस भोम श्रंराधर कांपी हो जी,

सुर तेतीसा की मेटी वीयादी ।1।

 

दूजी परसाल सतयुग माये खोली हो जी,

सरीयादे प्रहलाद रतना दे रटना लागी,

हिरयाकुश्यप ने हाथा सू हनिया हो जी,

सत्य धर्म की पाव बंधा दो ।2।

 

तीजी परसाल दुवापुर में खोली हो जी ।

बीलुचन्द हरिचन्द तारादे त्रीवादी,

श्री राम चन्द जी तो रावण ने मारया हो जी

पड़दे पधारिया सीता सत्यवादी ।3।

 

चोथी परसाल त्रेता में खोली हो जी,

देरवासा पांडु द्रोपती रटनां लागी,

चकर चलाये सीसपाला ने मारया हो जी

कस कला वे हुवा बड़ भागी ।4।

 

पांचवी परसाल कुल जुगमाये खोली होजी,

सुकराचारी बूल सज्यादे सत्येवादी

 पापी नुगराने दाता द्रस्टी सु हनीया हो जी,

रावला भगताने धापीयां हीमत बढ़ादी ।5।

 

योगतणाजी मेरम लीख गाया होजी,

 गोपी नाथ बीराज्या ब्रम गादी,

शंकरनाथ चरणा चीत लागा होजी

माके ग्रास उठा की ।6।

लागे जी माने सब जुग खारा हो शरणे जाऊ सन्त की laage ji mane sab jug khara ho sharne jau sant ki

 

लागे जी माने

सब जुग खारा हो

शरणे जाऊ सन्त की

करदे भव पारा हो ।टेर।

 

कोई हंसता फिरे कोई मस्ता फिरे

बीरल्ये की धारा हो

संत मिले प्रमारती

पावें अमरत धारा हो ।1।

 

नगटा नुगरा नेम तोड़ा

भादु भारा हो

संत मिले साहेब का बन्दा

करदे न्यादा हो ।2।

 

भाग अगामी मिलीया सांमी

माने डुबत तारी ओ

नीतर होता खुर खन्जरा

लादे वजन उपरा हो ।3।

 

छीलरीयाने मच्छी चुगता

देखीया अपारा हो

ऊडता हंस की पाख पकड़

प्रेम हंस पारा हो ।4।

 

गोपीनाथ माने पुरा गुरू मिलीया

डुबत तारीया हो

शंकर नाथ समझ मन मेरा

गढ़ में हुआ उजारा हो ।5।

हारे संत मारे आया ओ माने दर्शन दे haa re sant mare aaya o darshan de bharam

 

हांं रे संत मारे आया ओ

माने दर्शन दे 

मारा भरम मिटाया ओ

संत मारे आया हो ।1।

 

संत आया मंगल गाया

प्रसब लासना लाया हो

कीट का माने भरग बणा

माने फूल चुसाया हो ।1।

 

हरिया पीला श्याम सुकेता

लाल गुलाबी लाया हो

भाती- भाती कर जोविया

भीन्न- २ समझाया हो ।2।

 

प्रतम फुल प्रसता में

दो विश्वा परे आया हो

दुजा फूल प्रसता

चारा पर आया हो ।3।

 

तीजा फूल की केवुं ओ मेमा

विश्व आठ रोकाया हो

चोथा फूल प्रसता

दुवा दस पाया हो ।4।

 

फुल पांचवे सोना उपर

शील तेज गरनाया हो

शंकर नाथ दर्शन कर

ऊगम गढ़ पाया हो ।5।

मारा सतगुरु जी ने बली हारी बार-बार में लेऊ वारी mara satguru ji ne bali haari bar bar leu vari

 

मारा सतगुरु जी ने बली हारी

बार-बार में लेऊ वारी ।टेर।

 

सतगुरु सा सौदागर आया

ज्ञान गाठ गुरु गम की लाया

भर घाबा मोरा की लाया है

सागे आया मण धारी ।1।

 

नंगर बजारा नंग जमाया

सुता जीवा ने आए जगाया

मुझे मुक्ति का शब्द सुणाया है ।

परो जागरे व्यापारी ।2।

 

हाथा का हथपान लाया

पगलिया री मारे पायल लाया

बुन्दा रंग राचणी मेहन्दी लाया है

निरले के सुरता प्यारी ।3।

 

मुखड़ा री मारे चुपा लाया

काना रा गज मोती लाया

नैणा रो मारे सुरमो लाया

नाका नथड़ी नगवारी ।4।

 

फुट टूट ने बार निकाली

सही सही चीज ऊर में राली

प्रती तो पुर बली पालो है

लगे जमारी नहीं कारी ।5।

 

गोपी नाथ मारे सत गुरु धापा

शंकर नाथ चरणा चीत लाया

अबके सैज फुला की पाया है

और सेज लागे खारी ।6।

आछी दीदी ओ गुराजी माने ज्ञान गुटकी भरम कर्म की फोड़ी मटकी aachi didi o guraji mane gyan gutki

 

आछी दीदी ओ गुराजी

माने ज्ञान गुटकी

भरम कर्म की

फोड़ी मटकी ।टेर।

 

निर्भय नगर माय

लेकर आया है

संता का चरणा में

भारी सुरता लिपटी ।1।

 

संत आया जी मारे

शक्तियां भी आई है

प्रेम के दरवाजे  या

नुगरीया ने अटकी ।2।

 

मंगल गाया मारे

राम रस लाया है

प्रेम बादली मु

बुन्दा छटकी ।3।

 

हंसा ने तो

हीरा चुगाया है

कोरा रंगीया वे तो

नुगरा कपटी ।4।

 

शंकर नाथ चरणा

चीत लाया है

प्यारी लागेजी माने

गुरु भक्ति ।5।

 

लागे जी माने गुरु जी प्यारा हो भव सागर से तार के lage ji mane guruji pyara bhav sagar se taar ke

 

लागे जी माने गुरु जी प्यारा हो

भव सागर से तार के

करीया भवपारा हो

लागेजी माने गुरुजी प्यारा हो ।टेर।

 

पांच तत्व को पीजरों

ज्याके दस द्वारा हो

दसवे द्वारे चरण गुरू का 

मारे प्राण आधारा हो ।1।

 

कोई भजन करे कोई ज्ञान करें

कोई ध्यान की धारा हो

कोई पुजे गुरु चरणाने

हर दम एक तारा हो ।2।

 

जैसे कांच को सेकडे

पराने ऐई इसारा हो

पांचो मुन्दर युही पल्द लो

चमके तारा हो ।3।

 

जीणी र मुन्दरी बाणी बाजे

विण सीतारा ओ 

तीन जणी मिल मंगल गावे

रोझे पिवजी थारा ओ ।4।

 

सुख सागर में नावीया

मीटाया तीमर अंधारा हो

शंकर नाथ उण देश में

कब्जा थारा हों ।5।

मारा राम रो सन्देशो उरो लेता आज्यो mara Ram ro sandeso uro leta aajyo

 

मारा राम रो सन्देशो 

उरो लेता ज्यो ।

भक्ती ने भुल मत जाज्यो 

मारी लो ।टेर।

 

अन मीये कोस मायें 

पाव घर लीज्यो है ।

मन मीयसु गरब गर 

धाज्यो मारी लो ।1।

 

प्रणायाम कोस सु 

पुरस रीचक करज्यो है।

विज्ञान में सुकुमक 

भर भर लीज्यो मारी लो ।2।

 

नन्द मोये करससु 

ये सुख सागर नाज्यो है

गुराजी का दर्शन 

परा करज्यो मारी लो ।3।

 

मन भर संता सु 

मलतोड़ा आज्यो

अगजीत अमर फल 

खाज्यो मारी लो ।4।

 

पाछा आवो जदी 

रोता मती आज्यो है

ज्ञान वाली गाडीया 

भर भर लाज्यो मारी लो ।5।

 

पेल की कमाई थांरी 

अबके आडी आई है

शंकर नाथ ने संग 

माये लीज्यो मारी लो ।6।

सतगुरु भला आया हो सतसंग की वेला में satguru bhala aaya ho satsang ki vela me

 


सतगुरु भला या हो

सतसंग की वेला में ।टेर।

 

सतगुरु आया मेरे मन भाया

ज्ञान गाठ गुरु गम की लाया है।

रिजी का दर्शन पाया हो 

संध्या री वेला में ।1।

 

सुरे गाय का दुध मंगाया

मेरा गुरुजी का चरण खुया है।

अमृत बरसाया हो 

संता का मेला में ।2।


खीर खाड़ का भोजन बरणाया

और बरफी मेवा मंगाया है।

पंखा भाव दुलाया हो 

भोजन की वेला में ।3।

 

सतगुरु दाता शब्द सुजाया

अखे मगल का पाठ खुवाया है ।

हरीजी मारा भ्रम मिटाया हो

मन लागो माला में ।4।

 

शंकर नाथ चरण चीत काया

सत धर्म का पकडीया पाया ।

है सुख सागर नाया हो

गुरु काढि‍यो काला ने ।5।

मारा सतगुरु आया पावणा पपया बोले हो mara satguru aaya pavna papayya bole ho


 


मारा सतगुरु आया पावणा 

पपया बोले हो ।

मोर बोले हो कोयल बोले हो 

मारा सत गुरु आया पावणा पपया बोले ।टेर।

 

ऐसा योगी जुग में आया

भुला जीवा का भरम मिटाया ।

राम नाम का पट्टा लिखाया है

भेद सुकमण का खोले है।1।

 

पांच कोश पुरण समजाया

सात भोम का के समजाया ।

खट सरीर खोल दरसाया है

ज्ञान कॉटी में तोले हो ।2।

 

पांच पच्चीस की बणी काया

ज्याका रूप गुण दरसाया है ।

महा काल का पत्ता बताया है

तार में तार मिलाले हो ।3।

 

गोपी नाथ गुराजी ने धाया

शंकर नाथ चरणों चीत लाया ।

अब देश उगम को पाया है

आवीद वीरला खेले हो ।4।

आरोधीया आया हो भक्ता की वेला में aarodiya aaya ho bhakta ki vela me



 

आरोधीया आया हो

भक्ता की वेला में ।टेर।


कुम्‍हारी ने भजन पुकारा

मन्जीयारी का बच्चा उबारीया है।

आग में बाग लगाया हो

श्री यादे की बेला में ।1।

 

राजा हरिशचन्द्र राणी तारा

काशी माये विकीया सारा ।

चत्रभुज रूप वणाया हो

रोहितास की वेला में ।2।

 

पांड़वां ने पासा हारा

राज पाट खो दिया सारा ।

हरिजी ने हाथ पसारा हो

द्रोपदी की वेला में ।3।

 

राजा बली के आप पधारीया

बावन रूप लीया अवतारा है।

बली ने पाताल पढ़ाया हो

उदक की वेला में ।4।

 

गोपी नाथ जी सतगुरु धाया

शंकर नाथ चरण चीत लाया है ।

हरिजी माने पार लगाया हो

कलयुग की जाला में ।5।

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