सुता शेर जंगल का राजा उसे जगाणा ना चाहिए suta sher jangal ka raja use jagana na chahiye bhajan lyrics
हम पर किया बड़ा उपकार प्रणवत बारम्बार hum par kiya bada upkar pranvat barmbar bhajan lyrics
राम जी रो नाम म्हाने मीठो घणो लागे रे Ramji ro naam mane mitho gano lage re
नबजिया वेद क्या देखे मुझे दिल की बिमारी है nabjiya ved kya dekhe mujhe dil ki bimari hai
नबजिया वेद क्या देखे,
मुझे दिल की बिमारी है
।।टेर।।
कभी कफ रोग बतलावे,
कभी तासीर गर्मी की ।
जिगर का हाल तू मेरा,
तू नहीं जाणे अनाड़ी है
।।1।।
सनम की मोहनी मूरत,
बसी दिल बिच में मेरे ।
न दिल में चैन है तन की,
खबर सारी बिसारी है ।।2।।
असर करती नहीं कोई,
दवाई कीमिया तेरी ।
बिना दीदार गुरू के,
मिटे ना बेकरारी है ।।3।।
अगर दिलदार को मेरे,
मिलादे आज तू मुझ को ।
वो ब्रह्मानन्द गुण तेरा,
करूं मैं यादगारी है ।।4।।
म्हारा सिर पे गरूजी रो हाथ जमराजा म्हारो कई करसी mara sir pe guruji ro haath jamraja maro kai karsi bhajan lyrics
म्हारा सिर पे गरूजी रो
हाथ,
जमराजा म्हारो कई करसी
।।टेर।।
पंचभूत पच्चीस तत्व को,
मुझ में नहीं है लेश ।
सर्वव्यापी भूमा हूं मैं,
नहीं है अविद्या को लेश
।।1।।
तीन ताप और पंच क्लेश का,
मुझ में नहीं है लिगार ।
तीन देह अवस्था त्रिय,
दीनी है अविद्या ने जार
।।2।।
खट उर्मी अरू षष्ट अध्यास,
भ्रांति रूप संसार ।
मैं इनमें अन्वय कहाऊं,
सदा साक्षी निर्विकार
।।3।।
साकार निराकार मैं ही कहाऊं,
मैं ही अवधि अपार ।
घट घट माही मैं ही
प्रकाशुं,
मैं ही सबका हूं आधार
।।4।।
नाथ विवेक मिल्या गुरू
पूरा,
काल का किया संहार ।
शंकर नाथ आवे नहीं जावे,
सदा रहे एक सार ।।5।।
डस गयो रे कालो बेटा थारे गाल ने das gayo kalo beta thare gaal ne bhajan lyrics
डस गयो रे कालो बेटा थारे
गाल ने,
छाती भर आवे बेटा,
देखूं थारी लाश ने ।।टेर।।
फूल लेवण ने गयो,
बेटो म्हारो बाग में ।
डस गयो कालो बेरी,
गोरा गोरा गाल ने ।।1।।
जुल्म कियो है बेरी,
इस काले नाग ने ।
लेकर लाश रानी,
शमशान आई रे ।।2।।
अपणा हाथां सू,
राणी चिता सजाई रे ।
इतने में हरिचंद,
रोक दीनी लाश ने ।।3।।
पहले राणी जी थे,कर तो चुकाओ ।
पीछे राणी अपणा,कंवर ने जलाओ ।
कर तो चुका कर राणी,
फूंक देवो लाश ने ।।4।।
कहता है राजा सुणलो थे
राणी,
मैं तो भरू हूं नीच घर
पाणी ।
पैसो नहीं तो राणी,
साड़ी तेरे पास है ।।5।।
आधी साड़ी रो राणी कफन
बणायो,
आधी साड़ी से राणी कर ने
चुकायो ।
कर ने चुकाकर राणी,
फूकण लागी लाश ने ।।6।।
नील गगन से पुष्प जो बरसे,
बेटा बिना मां को हिवड़ो
तरसे ।
कृष्णा दासी राज गावे,
माधो संग गान रे ।।7।।
गाड़ी में बिठाले बाबा जाणो है नगर अंजार gadi me bithale baba jano nagar anjar bhajan lyrics
घणी दूर से चाल रह्यो
थारी गाडूली की लार ।
गाड़ी में बिठाले बाबा,
जाणो है नगर अंजार ।।टेर।।
नरसी बोल्यो वठे चाल थू
कई करसी,
इण कपड़ा के माय वठे सींया
मरसी ।
टूटी गाड़ी, बूढ़ा बलद्या,
पैदल जासी हार ।।1।।
नानी बाई रो भात देखबा
चालां ला,
आनो पावली थाली मांयने
नाकां ला ।
दोय दिन जीमण री वांकी,
राखां ला मनवार ।।2।।
ज्ञानदास जी बोल्यो रे
तूम्बा फोड़ेला,
सूरदास जी बोल्या गाड़ी
ने तोड़ेला ।
घणी भीड़ में टूटेला म्हारा,
इकतारा को तार ।।3।।
झोली में ले लीनी करोती और पाती,
किशनो म्हारो नाम जात रो
मैं खाती ।
चिंता की कोई बात नहीं
थारी,
गाड़ी देऊंला सुधार ।।4।।
जूड़ा ऊपर बैठ हांकस्यां
में नारा,
थे करजो विश्राम दबास्यूं
पग थारा ।
दोय घड़ी के तड़के थाने,
पहुंचाऊ नगर अंजार ।।5।।
टूटी गाड़ी देखो आ विमान
बणी,
नरसी गावे भजन सुणे म्हारो
श्याम धणी ।
सगला मोड्या मोर थपेड़े,
जीतो रह मोट्यार ।।6।।
भोला सा भगता का भाग तो अब
जाग्या,
दीनबंधु भगवान भाग मोटा
पाग्या ।
किशनो खाती करबा लागो,
संतो की मनवार ।।7।।
यो तिरलोकी को नाथ जाट के बण गयो हाळी रे tirloki ko nath jaat ke ban gayo hali re bhajan lyrics
कुण जाणे रे माया,
श्याम थारी अजब निराली रे
।
यो तिरलोकी को नाथ,
जाट के बण गयो हाळी रे
।।टेर।।
जाट-जाटणी निरभय सोवे,
सोवे छोरा छोरी रे ।
चारभुजा रे पहरे ऊपर,
कैया होवे चोरी रे ।।1।।
आवे चोर जद ऊबो पावे,
श्याम रूखाली रे ।
सौ बीघा रो खेत जाट के,
राम भरोसे खेती रे ।।2।।
आधा में तो गेहूं चणा,
आधा में दाणा मेथी रे ।
चोर आवे जद चककर खावे,
जावे खाली रे ।।3।।
बाजरिया को राम सोगरो,
ऊपर घी को लचको रे ।
पालक की तरकारी रान्दे,
भर मूली को बचको रे ।।4।।
छाछ राबड़ी रो करे कलेवो,
भर भर थाली रे ।
सोहन लाल लौहार कहे,
वो घर भगतां के आवे रे
।।5।।
धाबलिया रे ओले बैठ कर,
खूब खीचड़ो खावे रे ।
भगता के संग नाचे गावे,
दे दे ताली रे ।।6।।
माधव रे मन्दर में मीरां एकली खड़ी madhav re mandar me meera akali khadi bhajan lyrics
सांवरा आओ तो सरी,
मोहन आओ तो सरी ।
माधव रे मन्दर में,
मीरां एकली खड़ी ।।टेर।।
थे केवो तो सांवरा,
मैं जल जमना बण जाऊं ।
न्हावण लागे सांवरा,
थारे अंग अंग रम जाऊं
।।1।।
थे केवो तो सांवरा,
मैं मोर मुकुट बण जाऊं ।
पहरण लागे सांवरा,
थारे मस्तक पे रम जाऊं
।।2।।
थे केवो तो सांवरा,
मैं बांसुरिया बण जाऊं ।
बंशी बजावो सांवरा,
थारे होठां सूं लग जाऊं
।।3।।
थे केवो तो सांवरा,
मैं काजलियो बण जाऊं ।
काजल काढ़े सांवरा,
थारे नैना में रम जाऊं
।।4।।
थे केवो तो सांवरा,
थारे हिवड़े हार बण जाऊं ।
पहरण लागे सांवरा,
थारे हिवड़ा में रम जाऊं
।।5।।
थे केवो तो सांवरा,
मैं पग पायल बण जाऊं ।
रास रचावे सांवरा,
थारे चरणां में जाऊं ।।6।।
मीरां हर की लाड़ली,
वा है वचनां की सांची ।
चारभुजा का मन्दर में,
वा बांध घुघरा नाची ।।7।।
हेली होजा भजना वाली लार दिखाय लाऊ राम नगरी heli hoja bhajana vali lar dikhay lau Ram nagari
हेली होजा भजना वाली लार,
दिखाय लाऊ राम नगरी
।।टेर।।
हेली मत कर मान गुमान,
काया थारी ऐब से भरी ।
हेली सतगुरू शरणे चाल,
कड़ाऊ थारी ऐब ये परी
।।1।।
हेली ऊपराड़े बेरियां को
वास,
मारेला थाने हेल की घड़ी ।
हेली लारे लारे घूमरियो
काल,
जगत से जावेली परी ।।2।।
हेली भवसागर के मांय,
नांव अध बिच में खड़ी ।
हेली किण विध उतरेली,
फांसी मुआ जाल की पड़ी
।।3।।
हेली सोवनी शिखर गढ़ मांय,
गुरासां री सेज ढली ।
हेली चारो पाया दिवला जोय,
गुरूजी आगे निरत करी ।।4।।
हेली गुरू मिल्या
गुलाबीनाथ,
दीनी म्हाने ज्ञान की
झड़ी ।
हेली गावे भवानी नाथ,
भजन किया काया सुधरी ।।5।।
सैया आनन्द पायो ये सिर पर हाथ धर्यो गुरूदाता saiya anand payo ye sir pe hath daryo gurudata
सैया आनन्द पायो ये ।
सिर पर हाथ धर्यो गुरूदाता,
शब्द सुणाया ये ।।टेर।।
आज सखी री आंख फडूकी,
काग उड़ाया ये ।
गुरू मिलन की अजब उमेदी,
दरसण पाया ये ।।1।।
कली कली सब खिल गई सारी,
बाग सिंचाया ये ।
डाल डाल पर कोयल बोले,
भंवर गुजाया ये ।।2।।
अड़सठ तीरथ गुरू चरणा में,
निसदिन नहाया ये ।
निरमल काया होगी सारी,
उज्ज्वल थाया ये ।।3।।
सतगुरू देव जगत में आया,
हाथ दिखाया ये ।
संजीवन बूंटी घोल पिलाई,
दर्द मिटाया ये ।।4।।
धन धन बरस मास दिन बारा,
दीन मन भाया ये ।
मुहुर्त घड़ी लगन पल आछो,
शीश झुकाया ये ।।5।।
केवलराम मिल्या गुरू पूरा,
भाग सवाया ये ।
दानाराम गुरू के शरणे,
गुरू गुण गाया ये ।।6।।
म्हारी श्याणी सूरता, राम रस प्यालो झेलरी mhari shyani surta Ram ras pyalo jhel ri bhajan lyrics
पापी का मुख से राम नाही निकले केसर ढुल गई गारा में paapi ka mukh se Ram nahi nikle keshar dul gayi gara me
पापी का मुख से राम नाही निकले,
केसर ढुल गई गारा में ।
मनख जमारो ऐलो मती खोवे,
सुकृत कर लो जमारा में ।।टेर।।
कांच महल में कुतिया सुला दी,
रंगमहल चौबारा में ।
एक एक कांच में दो दो दीखे,
भस भस मरी रे जमारा में ।।1।।
भैंस पदमणी ने हार पहरायो,
वा कई जाणे नौसर हारा में ।
पहर न जाणे वा तो ओढ़ न जाणे,
जनम गमायो गोबर गारा में ।।2।।
सोना का थाल में सुरड़ी ने
परोस्या,
वा कई जाणे जीमण वारां में ।
जीम न जाणे वा तो चूट न जाणे,
हुल्ड़ हुल्ड़ करी जमारा
में ।।3।।
हीरा ले मूरख ने दीदा,
दलबा लागो सारा ने ।
हीरा ने तो जौहरी जाणे,
ना ही तोल गवारां ने ।।4।।
राम नाम की ढाल बणा लो,
दया धरम तलवारां ने ।
अमरनाथ कहे भक्तो से,
तब जीतोला जम द्वारा ने ।।5।।
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