मेनादे जी मालकने रमाया है अजमल जी के काज धार Menade ji malak ne ramaya hai Ajmal ji ke kaaj

 


मेनादे जी मालकने रमाया है

अजमल जी के काज धार 

अवतार पालणीया में आया है ।टेर।

 

राजा दसरथजी आपने आरोध्या

अयोध्या में आया है ।

माता कौसल्‍या देवे मचोलो

राम लक्ष्मण जुलाया है ।1।

 

अत्री रिसी के घर आप पधारीया

श्री मुख रूप धराया है ।

ब्रह्मा विष्णु महेश अनुसुया जी धाया

दत्तातरी जी कुवाया है ।2।

 

वसुदेवजी रा कवर कंवाया

देवकी जीरा जाया है ।

नंद मेहर घर गऊ चराई

माता यसोदा रमाया है ।3।

 

रावत भोज घर आप पधारीया

ऊदल नाम धराया है ।

रूप नाथ जी री मेहर हुई

ये माता साडू जी रमाया है ।4।

 

समत् पेतीस पोष सुद पुनम

मा गरीबा के आया है ।

शंकर नाथ वंदावो गावे

मारे घर रायल मन्ड़ाया है  ।5।

सयाये डाली बाई धारू घर आया है sayaye Daali bai Dharu ghar aaya hai



 सयाये डाली बाई

धारू घर आया है ।

भक्ता के काज मे

धार अवतार रुणेजा में आया है ।टैर।

 

भवर नाथ मुनी तपस्या करी

ये लुणी नंदी तट थाया है ।

स्वर्ग लोक सु सुवागण आई

मुनी का मन डगाया है ।1।

 

जाल तणी डाल हुआ प्रतीपाल

डाली बाई नाम धराया है ।

लेय कन्या धारू घर आया

बाई ने हर्ष बन्दाया है ।2।

 

सतयुग में हररणाकुश ने हनियो

द्वावापुर रावण खपाया है ।

त्रेता में कोरवा को खपर भरीयों

कलु में भक्ता ने बन्दाया है ।3।

 

पछम का पीर बदाई बाई ने

धीर धर्म की बैन बणाया है ।

अंसंग जुगा में सह जोड़े रमिया

कलु में काकण बंदाया है ।4।

 

ब्रह्मा विष्णु महेश आप उपाया

श्री गुण नार कवाया है ।

सह जोडा सु लिनी समाधी

शंकर नाथ गुण गाया है ।5।

मारे घर आवो जी अजमलजी रा कंवरा करू मनवारी ओ mare ghar aavo Ajamalji ra kanwara karu manwari


 

हां रे मारे घर आवो जी

अजमलजी रा कंवरा।

करू मनवारी ओ

मारे घर आवो तो ।टेर।

 

कंकु केशर की धार गलाऊ

थारो मन्दीरीयो दुवाऊ जी ।

आता दिखे कंवर जो थाके

कलश कन्दाओ दर्शन देवो तो ।1।

 

कोरी माटी का कलश मगाऊ

थारे मोतीया चौंक पुराओ।

अधर दराऊ बैठना धारे 

चंवर दुवाओ दर्शन देवो तो ।2।

 

खीर खाड़ का भोजन बनाऊ

ओरी उजका भात रन्दाओ ।

चटकीया बनाऊ चुरमा माये

घीर्त मिकाऊ ओ रन्जने जीमो तो ।3।

 

हीगुल पागा को ढोलीयो ढलाऊ

फुलडा सेज रला आऊ।

तन मन धन में कर निचरावल

भाव दुलाऊ ओ सुख भर पोड़ो तो ।4।

 

दुःखी ने सुखीया करज्यों

निरधन ने धन देवो ओ।

कपटीया ने गाटा कुटजो

थाने आज दिराऊजो मारी पत मानो तो ।5।

 

धणीया ने धारा जो तो

अमरापुर में पाया ओ।

शंकर नाथ लिख परवाना

हाथ जेलाया ओ ओ फल पावे तो ।6।

सतयुग दुवापुर त्रेता ने तार कलयुग माये आया है satyug dwapur treta ne tar kalyug maye aaya hai

 



सतयुग दुवापुर त्रेता ने तार 

कलयुग माये आया है

सयाये अजमल घर आया है ।टेर।

 

जब जब भार भया भोमी पर

सतगुरु जग माये आया है।

नौ अवतार पेली धारीया

दसवा निकलंग आया है |1|

 

घर बासकजी के अटल भक्ति

पुरण पाट पुराया है।

उड़ण सरीयादे ने नेम दिया हो

धरा पर धर्म कलाया है ।2।

 

शंकासुर ने रतन चुराया

समन्दा पार पराया है ।

मच्छा कच्छा अवतार धार

देवा का कारज सराया है ।3।

 

बारा बुद्धा नरसिंह धार

परसुराम कुवाया है ।

सस्त्राबाहु से बदलो लीयो

ना क्षत्रि कराया है ।4।

 

रामचन्द्र जी तो रावण ने मारीया

बावन वली घर आया है ।

कृष्ण कलासु कैरवा पर कोपीया

द्रोपदी का चीर बढाया है ।5।

 

धर अवतार रूणे में आया

रामा कंवर कुवाया है ।

शंकर नाथ बदावो गावे

मारा फन्द छुडाया है ।6।

9 नागल ने शुद्ध कर देखो अवतारा विश्राम लिया 9 nagal ne sudh kar dekho avtara vishram liya

 नो नागल ने शुद्ध कर देखो

अवतारा विश्राम लिया ।

रावत भोज के घरे पधारीया

साडु जी सरा लिया हो जी ॥ 1 

 

देव पुरी सु देव पधारीया

गोटा में गमसाण की किया ।

मथरा डुंगरीया आई माता

हीरा ने संग में किया हो जी ॥2


माघ का महिना पक्ष चानणा

साते शनिश्चर वार लिया ।

काकर फुटी कंवल पारसीया

भड़ जतरा बेतार किया हो जी ॥3

 

माता साड करे आरती

धन-धन धर्म उदये विया ।

भोज की भक्ती के कारण

कृष्ण का पत्र लिया हो जी ॥4

 

माला घर में आप पधारीया

सीन्धु भड़ विश्राम लिया ।

चोसु भाट ने जीवन किदा

गुजरी बनी को तार लिया हो जी ॥5

 

आधर धोवतीया तपे आपके

तलेटी स्नान किया ।

हमीर सि‍ह ने परचों दीदो

सारंग ने सरजीव किया हो जी ॥6

 

छ भागी भुण मदन मेन्दुजी

पांचवा उदल नाम विया ।

पांच भाया मल थापी थापना

धरा परे अमर नाम किया हो जी ॥7

 

अनेका ने आगे उबारीया

जुग-जुग परचा पातरीया ।

शंकर नाथ के आओ आरोध्या

कलयुग में शरण लिया ओ जी ॥8

जीणी बाणी संत पिचाणी आठ पेर हाजर रीज्यो jhini baani sant pichani 8 per haajar rijo



 जीणी बाणी संत पिचाणी

आठ पेर हाजर रीज्यो।

अमरत- गत पर आप विराजे

पल-पल दर्शन कर लिज्यो ॥टेर॥

 

मुल कमल का मंजन करज्यो

भेद गुरा से सुण लिज्यो।

साड़ा तीन पेच फेरा कर

गुणपत देव मना लिज्या हो जी॥1॥

 

लगे कवल में हीरा निपजे

जवरी बिना ये मत दीज्यो।

नीत प्रलय की नगे राखज्‍यो

पार ब्रह्म परख लीज्यो हो जी ॥2

 

नाब कवल नीकलंग जीका

वासा पुरख पुरा भर लिज्यो।

मैरूदण्ड के छेदन करके

तार में तार मिला लिज्यों हो जी ॥3

 

हीरदा कुवल मे हरिजी ने पाया

सब्दा तरणा सौदा करज्यों।

मन भर मीलांया सायरा भलीयां

अमर बाता कर कीज्यों हो जी॥4॥

 

कंट कवल केसर की क्यारी

कली-कली रस किज्यो।

पीये प्याला संत मतवाला

मन माता मगन रीज्यो हो जी ॥5॥

 

तरबीणी में हैरो बैकरी

मुकमण के साथ रीज्यो।

छः सासा में सार मिला कर

जाकर डंका सुण लिज्यो हो जी ॥6॥

 

दसवा माये दर्शन करके

आगे पगलिया धर लिज्यों।

छम-छम मुन्‍दरी बोले

निरगुण माला भज लिज्‍यो हो जी ॥7॥

 

गोपी नाथ मिल्‍या गुरू पुरा

दुर्बल पर दया करज्‍यो।

शंकरनाथ गुरूजी के शरणे

अमर राज भामा कर लिज्‍यो हो जी ॥8॥

राम नाम रंग लागा मारा भाग आगला जागा है Ram naam rang laga mara bhag aagla jaga


 

राम नाम रंग लागा

मारा भाग आगला जागा है

चरणा में आपके शीश नवाया

देखीया देश गुंरा का है ओ जी ॥1॥

 

चार जुगा से जागा प्राणी

सतसंग में रंग लागा है।

सतगुरु मीलया शब्द सुणाया

जम पसारा सब चाका है ओ जी ॥2॥

 

जगत शब्द सुणावे कुड़ा

ज्या से मन मेरा भागा है।

संत समागम शीतल छाया

वामे बैठवा लागा है ओ जी ॥3॥

 

कुड़ा कपटी लापर लोबी

गुड़ के मकोड़ा लागा है।

नुगरा ने मलिया काचा हंस

केउं कन कागा है ओ जी ॥4॥

 

साचा जके जुगाई जुग साचा

शीवरण करिया साचा है।

मुआ जाल मेटियों आपो

फैर नहीं आबा का है ओ जी ॥5

 

ऐ अवसर फैर नहीं आवे

शीवरण करना साचा है।

शंकर नाथ गुराजी के शरणे

माने आपकी आशा है ओ जी ॥6

 

सीवरों सादा गणपत देवा भुल भरम में मत रीजो sivaro sada ganpat deva bhul bharm me mat rijo



 सीवरों सादा गणपत देवा,

भुल भरम में मत रीजो

निरभय पिया जी निरगुण धारा,

सरीगुण काज सरालिजो ॥1


गुणा के पति गुराजी ने शीवरू,

त्रीगुण त्राप मिटा दिजो।

गवरी के पुत्र गजानन्द शीवरू,

रीद्धी सीद्धी ने संग लिजो ॥2


तोड़ी भीत रीत सब जाणी,

दर्शन कर मारो मन रीज्‍यो।

चरण कमल में गंगा खलकी,

ले प्यालो अमरत पीज्यो ||3


जोग भोग संजोगु पारा,

विजोग वासना ने पर हरजो।

पांच विषय ने परले मेलो,

पांच बेडी पुजन करजो ॥4


नांव धर्म ने नरबे जाणो,

और देव ने मत पुजो।

पड़ो ला पंड पार नहीं जावो,

अतरो भरसी लिखर लिज्यों॥5


गोपीनाथ मिलीया गुरु पुरा,

धायो देव मा नही दुजो।

शंकर नाथ गुराजी के शरणे,

नाम को पकडीयो पन्जो ॥6

गुरू चरणां मन लागा मारा काम क्रोध सब त्‍यागा है guru charna man laga kaam krodh sab tyaga

 


गुरू चरणां मन लागा मारा,

काम क्रोध सब त्‍यागा है।

अके मण्‍डल में आसण दीदा,

हरदम डंका लागा है।।टेर।।

 

पहला जाय पुरूष ने हेर्या,

सुकमण धोर लागा है।

वो हाथे नहीं आया,

नूरती सूं निरखण लागा है।।2।।

 

ऐसा पुरूष आद अनादि,

छाया धूप नहीं लागा है।

खण्‍ड ब्रहमण्‍ड  रमता रावल,

तोड़ दिया जम धागा है।।3।।

 

पांच कोस और सात भोम का,

खट शरीरा ऊ आशा है।

अदर दलीचे आसन वांका,

चित चरणां में लागा है।।4।।

 

गोपी नाथ मिलिया गुरू पूरा,

घर बताया माने आगा है।

शंकर नाथ गुराजी के शरणे ,

शीश दिया जब लादा है।।5।।

 

 

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