दोहा: राम नाम की लूट है, लूट
सके तो लूट।
अन्त काल पछतायेगा, जब प्राण जायेगा छूट।।
हंसा निकल गया काया से,
खाली पड़ी रहे तस्वीर।।टेर।।
जम के दूत लेने आवे,
नेक धरे नहीं धीर।
मार मार कर प्राण निकाले,
ढरे नयन से नीर।।1।।
बहुत मनाये देवी देवता,
कोई बहुत मनाये पीर।
अन्त समय कोई काम न आवे,
जाणा पड़े आखिर।।2।।
कोई नहलावे कोई धुलावे,
कोई ओढ़ावे चीर।
चार जणा मिल मतो उपायो,
ले गये जमना / मरगट तीर।।3।।
माल मुलक की कोन चलावे,
संग नहीं चले रे शरीर।
जाय जंगल में चिता चुणाई,
कह गये दास कबीर।।4।।
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