पियाजी बिना सुनो ए सखी सिणगार।।टेर।।
काजल गाले पट्टा पाड़े,
जीबा में धिक्कार।
ओम नाम हृदय नहीं रटसी,
जमराणो लारम लार।।1।।
पतिव्रता नार पियाजीकी प्यारी,
दरसण की बलिहार।
एक सती नगर ने तार्यो,
आपू ही तरगी लार।।2।।
मीरां ने राणो दु:ख दीदो,
काढ़ी घर के बाहर।
सांचा पिया से प्रीत लागी,
राणो गियो हार।।3।।
ऋषि मुनि ध्यान लगावे,
आठ पोहर इकसार।
बैकुंठा से पाछा आया,
नहीं
मिल्या करतार।।4।।
खेतारामजी सतगरू मिलिया,
अमर चूड़ो सिणगार।
रूगाराम सेण सतगरू की,
हर भज उतरो पार।।5।।
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