दोहा लिखमा जी doha likhamaji mali

:::दोहा:::


नीवण बिन एक नीवण,

गुरू नीवण कर जोड़।

निवणज देवी शारदा,

भूल्‍या देवे जोड़।।1।।


रामां थे अजमालरा,

मती आप रे मोजी।

काेेेेढिया रा कलंक झाड़ बापजी,

दो भूखा ने रोजी।।2।।


रामा कहूं के रामदे,

पीरा हदो पीर।

दुनिया आवत जातरा,

ताजा करो शरीर।।3।।

धिन देवल धिन देवरा,

धिन रूणिचो गांव।

भला पीछम में प्रगटिया,

नवखंंड माही नांव।।4।।


रामो कहुं कण रामदे,

माेतियां बिचली लाल।

ज्‍याते मिलिया रामदेव,

ज्‍याने किया निहाल।।5।।


पीरांई बंदी पाल,

उंडो जल अजमालरा।

जल डूबती जाज,

जके रमता तारी रामदेव।।6।।


लिखमा लावे लो रामदे,

साजो धणी सधीर।

चरण पकड़ सोरा रिया,

सुद बुद दिया शरीर।।7।।


सुद बुद दिया शरीर,

जुगत तो झाणीवणी।

दुख दालद किया दूर,

सिंवरयांं ते रामो धणी।।8।।


लिखमा धणी धुरलो जाणले,

राम रामदे एक।

भगत उधारण अवतरियो,

अजमल धरा अलेख।।9।।


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