साधू भाई गुरू बिन मुक्ति न पावे अगम निगम सत गावे sadhu bhai guru bin mukti na pave agam nigam sat gave

 साधू भाई गुरू बिन मुक्ति न पावे।

नित सतसंग रहो गुरू आगे,

अगम निगम सत गावे।।टेर।।

 

गुरू बिन ज्ञान ध्‍यान नहीं सूजे,

गरू बिन गोता खावे।

गरू बिन मूरख फिरे भटकता,

हाथ कछू नहीं आवे।।1।।

 

गरू बिन जिवड़ो जाय चोरासी,

बहुत ही जनम धरावे।

माछर मकोड़ा होवे गीगला,

जग पेरा तले आवे।।2।।

 

व्‍यास पुत्र मुनि ध्‍यान लगायो,

रात दिवस लिव लावे।

एक दिन वाज सुणी आकाशा,

जनक मिल्‍या गम आवे।।3।।

 

पूसाराम गुरू सामर्थ स्‍वामी,

भक्ति को बाग लगायो।

रामधन गरू कृपालु ऐसा,

मुक्‍त भेद दरसावे।।4।।

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