साजन सियाली बचन उनाली साक बेड़ा वाली sadhu bhai hegya Ramji ka haali

 


साजन सियाली बचन उनाली साक बेड़ा वाली,

साधू भाई हेग्‍या रामजी का हाली।।टेर।।

 

समझ नाड़ी पाल गाड़ी,

ज्ञान का आवे भाला भाहली।

सांवटो सेरो अनटूट बेरो,

शब्‍द पाट्या बन्‍दावाली।।1।।

 

अब खेती न हांकी,

ऊसर नेड़ी ने टाली।

राम रंग रेलणा आसोज रंग ओलणा,

सत्‍ता सायबा वाली।।2।।

 

खेती ने हांक चौक कीदी त्‍यारी,

हुंवार दीदी रूड़ी भारी।

गुरगम गांठ गोबन धर राल्‍या,

उरे है छछियारी।।3।।

 

ऊबी थारी खेती कोरवाण आई,

भाव बेरा ने कर त्‍यारी।

प्रेम पाठ लाभ धाबड़ो,

छड़ चलावे मन माली।।4।।

 

अब खेती काटण आई,

काट खला में राळी।

पांच पची को घाणो जुतायो,

माद दीदी रूड़ी भारी।।5।।

 

तूक तुवाय उपण लागा,

सूपड़ा लावे सुरता प्‍यारी।

साठ करोड़ तो मरोड़ में डूबा,

खांखला की धड़ न्‍यारी।।6।।

 

कण नेपत तवाया के पागे,

तेतीस हिया अदकारी।

गुजर गरीबो कनीरामजी’ बोले,

गुरां मारी साक सुधारी।।7।।

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