सतगुरु आवो म्‍हारे आंगणे satguru aavo maare aangne prem bhav su bhadava



सतगुरु आवो म्‍हारे आंगणे,

प्रेम भाव सूं भदावा।

धिन गुरु आवो मेरे आंगणे।।टेर।।


कूमकूम केशर री गारा गलाउ,

घर आंगण निपवाउ।

चवण रो चौक ढलाय,

गुरु ने घणा हर्ख मनाउ।।1।।


मोह माया को छोड़ कर,

चरणां शीस नवाउं।

 उंचा आसण धर गुरां का,

दूध सूं पांव खोजाउं।।2।।


भाई बन्‍धु कुटम्‍ब सब सामिल,

गुरु से हेत कराउं।

पांव पखार लेवां चरणामृत,

हृदय शुद्ध कराउं।।3।।


प्रेम प्रीत रा थाल मंगाउ,

भाव रो भोजन बनाउ।

सत्‍य री बाजोट ढलाय गुरु रे,

अपने हाथ जीमाउ।।4।।


सतसंग कराउ हेतसूं,

भारी प्रेम सूं प्रसाद मंगाउ।

गुरुजी रा वचन घर दिखा मैं,

घणे हर्ख सूं गाउ।।5।।


हींगलू पागा रा ढोलिया ढलाउ,

सिरख पतरना बिछाउ।

तन मन धन निछावर करके,

पंखे भाव ढलाउ।।6।।


सतगुरु आया मेरे मन भाया,

शीश रो नारेल चढ़ाउ।

गुरु खिवजी से ''माली लिखमो'',

घणे हेत सूं गावे।।7।।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

लोकप्रिय पोस्ट

जल ज‌इयो जिह्वा पापनी राम के नाम बिना रे JAL JAIYO JIVHA PAPNI RAM KE NAAM BINA RE

राम के नाम बिना रे मूरख  राम के नाम बिना रे, जल ज‌इयो जिह्वा पापनी, राम के नाम बिना रे ।।टेर।। क्षत्रिय आन बिना, विप्र ज्ञाण बिना, भोजन मान ...