साधू भाई गुरूगम सेण अथाई।
जीव ब्रह्म का भेद मटाया,
दुतिया रही ना कांई।।टेर।।
ना कोई जगत भगत ना दरशे,
योग न भोग ठहराई।
चंद न सूरा सांच न कूरा,
द्वेत की धूर उडाई।।1।।
राव न रंका निर्भय निसंका,
सम दृष्टि सम आई।
हूं तू मेट्या परमानन्द भेट्या,
निर्गुण अलख गोसाई।।2।।
माया मिथ्या त्रिगुण ततसारा,
निज इक शुद्ध सजाई।
सतगुरू सोजी लख्या अनुमोजी,
अणगड़ माही समाई।।3।।
अकथ कथा अलिख को लिखिया,
केवल ब्रह्म निरदाई।
रामप्रकाश अधिष्ठान आतमा,
केवल ब्रह्म निरदाई।।4।।
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